Sundar Pichai AI Statement: Google के CEO सुंदर पिचाई ने AI को लेकर एक बड़ा और साफ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत है कि Google AI की दौड़ में पीछे रह गया था। पिचाई के अनुसार, Google के पास पहले से ही चैटबॉट जैसी आधुनिक तकनीक मौजूद थी, लेकिन कंपनी ने उसे जानबूझकर समय से पहले लॉन्च नहीं किया।
एक पॉडकास्ट में जॉन कॉलिसन से बातचीत के दौरान पिचाई ने बताया कि Google ने बहुत पहले ही ऐसे AI सिस्टम तैयार कर लिए थे, जो आज के चैटबॉट्स जैसे काम कर सकते थे, लेकिन उस समय इन तकनीकों को सार्वजनिक करने का फैसला नहीं लिया गया क्योंकि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल थे।
Google ने ChatGPT से पहले ही AI चैटबॉट तैयार कर लिए थे, लेकिन उन्हें लॉन्च नहीं किया गया। सुंदर पिचाई ने बताया इसके पीछे सुरक्षा और टेक्नोलॉजी की बड़ी वजहें थीं।
LaMDA विवाद और ‘सचेत AI’ का दावा
पिचाई ने 2022 में हुए उस विवाद का भी जिक्र किया, जब Google के इंजीनियर ब्लेक लेमोइन ने दावा किया था कि कंपनी का AI सिस्टम LaMDA ‘सचेत’ हो गया है। लेमोइन ने इसके कुछ चैट रिकॉर्ड भी साझा किए थे, जिनमें AI भावनाओं और डर जैसी बातें करता दिखा।
हालांकि, Google ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया था। अधिकतर AI विशेषज्ञों ने भी कहा कि LaMDA कोई चेतन इकाई नहीं था, बल्कि एक बहुत ही एडवांस लैंग्वेज मॉडल था। पिचाई ने साफ किया कि LaMDA वास्तव में उस समय का एक शुरुआती AI प्रोटोटाइप था, जो आगे चलकर ChatGPT जैसे टूल्स की नींव बना, लेकिन उसमें उस स्तर की सुरक्षा और सुधार तकनीकें नहीं थीं, जो आज जरूरी मानी जाती हैं।
सुरक्षा और गुणवत्ता के कारण लिया गया फैसला
पिचाई के अनुसार, Google अपने प्रोडक्ट्स के लिए बहुत सख्त क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड अपनाता है, खासकर सर्च जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर। उस समय AI सिस्टम में कई ऐसे जवाब आते थे जो गलत या खतरनाक हो सकते थे। उन्होंने बताया कि उस समय सिस्टम में Reinforcement Learning with Human Feedback (RLHF) जैसी जरूरी तकनीक पूरी तरह विकसित नहीं थी। यही तकनीक AI को अधिक सुरक्षित और सही जवाब देने में मदद करती है। इसी वजह से गूगल ने उस तकनीक को तुरंत लॉन्च नहीं किया।
ChatGPT के बाद ‘कोड रेड’ और तेज बदलाव
2022 के अंत में जब OpenAI ने ChatGPT लॉन्च किया, तो यह तेजी से वायरल हो गया। इसकी लोकप्रियता ने टेक दुनिया में बड़ा बदलाव ला दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सफलता के बाद Google के अंदर ‘कोड रेड’ जैसी स्थिति बन गई। इसके बाद Google ने अपनी AI रिसर्च, प्रोडक्ट और सेफ्टी टीमों को तेजी से दोबारा संगठित किया ताकि वह तेजी से प्रतिस्पर्धा कर सके।
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Bard से Gemini तक Google की वापसी
2023 में Google ने अपना AI टूल Bard लॉन्च किया, लेकिन शुरुआती दौर में इसमें कई गलतियां सामने आईं। इसके बाद कंपनी ने इसे अपडेट किया और बाद में इसका नाम बदलकर Gemini रख दिया, जो अब गूगल का प्रमुख AI प्लेटफॉर्म है।
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क्या है पिचाई का दावा
पिचाई ने कहा कि Google का AI लॉन्च में देर करना कोई कमजोरी नहीं थी, बल्कि एक सोच-समझकर लिया गया रणनीतिक फैसला था। उन्होंने कहा कि कंपनी हमेशा सही समय और सुरक्षित तकनीक के साथ आगे बढ़ती है। उनके अनुसार, Google AI की दौड़ में पीछे नहीं है, बल्कि उसने शुरुआत से ही जिम्मेदारी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
