OpenAI 4 day week proposal

अब 5 नहीं 4 दिन काम! AI के दौर में बदल जाएगी नौकरी और कमाई का गणित

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April 6, 2026

AI impact on jobs:  Artificial Intelligence अब लोगों की नौकरी, काम के घंटे और आर्थिक ढांचे को भी प्रभावित करने लगा है। इसी को देखते हुए OpenAI भविष्य में काम करने के तौर-तरीके को लेकर अपने विचार दिए हैं। जो वर्तामान नौकरी मॉडल को बदलकर रख देगा। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

जानें AI के कारण संभावित जॉब लॉस को देखते हुए OpenAI ने टैक्स सिस्टम, सामाजिक सुरक्षा और पब्लिक वेल्थ फंड पर क्या दिए नए विचार।

4 दिन काम लेकिन सैलरी वही

कंपनी ने एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट में सुझाव दिया है कि सरकारों और बिज़नेस को ढाँचागत बदलावों के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, जिसमें काम के हफ़्ते को छोटा करना, टैक्स के नए मॉडल और मज़बूत सामाजिक सहायता प्रणालियाँ शामिल हैं। जिसमें सबसे विशेष हप्ते में 4 दिन काम के सुझाव शामिल हैं। लेकिन सबसे खास बता यह है कि लेकिन कर्मियों की सैलरी कम नहीं होगी। अगर ऐसा हुआ तो आनेवाले समय में वर्क मॉडल को बदल कर रख सकता है। कंपनी का मानना है कि एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, तो काम के घंटे भी घटाए जा सकते हैं। इसके अलावे कंपनी का यह भी कहना है कि

टैक्स सिस्टम में बदलाव के संकेत

इस विचार के पीछे दूसरा पहलु भी है। यह टैक्स सिस्टम से जुड़ा है। कंपनी के विचारों से यह पता चलता है कि आगे चलकर केवल वेतन के आधार पर टैक्स मॉडल नहीं रहेगा। इसके बदले कॉर्पोरेट प्रॉफिट औऱ पूंजीगत लाभ पर ज्यादा ध्यान देना होगा। इतना ही ऑटोमेशन पर टैक्स लगाने का विचार सामने आया है। ताकि मशीनों से लाभ का हिस्सा एक दूसरे को मिल सके। लागत कम करने या कर्मचारियों की संख्या घटाने के लिए सिर्फ़ ऑटोमेशन का इस्तेमाल करने के बजाय, बिज़नेस इसका इस्तेमाल कर्मचारियों को ज़्यादा छुट्टी देने के लिए कर सकते हैं।

पब्लिक वेल्थ फंड का भी सुझाव

कंपनी ने प्रस्ताव दिया है कि अमेरिकी सरकार को आगे आना चाहिए और मालिकों को इंसेंटिव देने चाहिए। AI से होने वाली प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी को कर्मचारियों के अतिरिक्त फ़ायदों से जोड़ा जाए। ताकि ऑटोमेशन से होने वाली कार्यक्षमता में सुधार का सीधा फ़ायदा मिले। वहीं, एआई के बढ़ते प्रभाव से नौकरी में कमी की आशंका की बात कही जा रही है। जिसे देखते हुए ओपन एआई ने पब्लिक वेल्थ फंड का भी सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत, सरकार और कंपनियाँ उन संपत्तियों में निवेश कर सकती हैं। जिन्हें AI के विकास से फ़ायदा होता है, और उससे होने वाले मुनाफ़े को नागरिकों के बीच बाँटा जा सकता है। इससे आय में असमानता को कम किया जा सकता है।

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सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूती पर विचार

इस प्रस्ताव में सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। मान लिजिए अगर एआई की वजह से बेरोजगारी में बढोत्तरी होती है तो उसके लिए एक ऐसा सिस्टम हो जिससे स्वत: लोगों को आर्थिक सहायता मिलना शुरू हो जाए। जो एक तरह का ओटोमैटिक सेफ्टी नेट की तरह होगा।

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अन्य टेक कंपनियां भी दे रही है संकेत

यह सोच अब टेक इडस्ट्री में तेजगति से फैल रही है। Anthropic के Dario Amodei ने पहले ही संकेत दिया है कि एडवांस्ड AI के बढ़ने से अर्थव्यवस्थाओं के काम करने के तरीके पर पूरी तरह से फिर से सोचने की ज़रूरत पड़ सकती है। सैम अल्टमैन  के Universal Basic Income  का विचार भी इसी से मिलती- जुलती है।

इस बात ने यह तय कर दिया है कि आनेवाले समय मनुष्य के काम, कमाई और जीवनशैली को बदलकर रख सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक कैसे पहुंचेगा।

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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