YouTube AI Slop: अब YouTube अपने प्लेटफॉर्म पर बढ़ते AI आधारित कम गुणवत्तावाले वीडियो की समस्या के समाधान के लिए कमर कस लिया है। इसके लिए कंपनी ने एक नया तरीका अपनाया है। YouTube ने AI Slop फीचर को जोड़ा है। जिससे अब मोबाइल ऐप पर वीडियो रेटिंग करते समय यूजर्स से पूछा जाएगा कि क्या यह वीडियो AI स्लॉप जैसा लगता है। इसके लिए दो विकल्प भी मिलेगा। पहला बिल्कुल ही नहीं और दूसरा बहुत ज्यादा। तो आइए जानते हैं इसके बारे में।
YouTube ने मोबाइल ऐप में नया फीचर किया लॉन्च… अब एआई से बना वीडियो को यूजर्स कर सकते हैं पहचना…जानिए इसकी खासियत।
मानव समीक्षा प्रणाली के ऊपर काम
बता दें कि यह फीचर YouTube की मौजूदा ऑटोमेटेड और मानव समीक्षा प्रणाली के ऊपर काम करता है। सवाल उठता है कि अगर इस तरह से पहचान होने लगे तो फिर क्रिएटर्स का क्या होगा। हलांकि, इसको लेकर कंपनी साफ कहा है कि क्रिएटर्स को AI Tools उपयोग करने से रोक नहीं किया गया है और न ही AI कंटेंट का खुलासा करना अनिवार्य है। लेकिन ध्यान यह देना होगा कि कम गुणवत्ता वाले वीडियो न हो। अगर ऐसा पाया गया तो मोनेटाइजेशन खतरे में पड़ सकता है।
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बच्चों और वयस्कों पर असर
कंपनी के सर्वे रिपोर्ट में पाया गया है कि नए अकाउंट के पहले 500 सुझाए गए वीडियो में 21% AI स्लॉप और 33% ब्रेनरॉट कैटेगरी में आते हैं। मीडिया जांच के मुताबिक हजारों बच्चों के लिए बनाए गए वीडियो शैक्षिक दिखते हैं। लेकिन क्वालिटी अच्छे नहीं होते हैं। ऐसा लगता है कम रिजल्यूशन में बनाकर डाले गए हैं। जो बुजुर्ग और छोटे दर्शकों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
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दर्शकों की रेटिंग्स को कैसे मापा जाए स्पष्ट नहीं
हलांकि अभी तक YouTube ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वो दर्शकों की रेटिंग्स को कैसे मापा या इस्तेमाल किया जाएगा। यूजर्स को इस बात का डर सताने लगा है कि बड़े संख्या इस तरह के Feedback लेने पर इसे AI मॉडल के प्रशिक्षण डेटा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे भविष्य में एआई आधारित वीडियो को पहचानना और मुश्किल हो सकती है।
YouTube की यह Viewer Feedback सुविधा प्लेटफ़ॉर्म को अधिक सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला बनाने के लिए एक प्रयास है।
