China Four Red Lines: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन यात्रा पर है। लेकिन उनके यात्रा से पहले बीजिंग ने अपने कड़े रुख को दोबारा स्पष्ट किया है। चीन ने कहा है कि अमेरिका के साथ संबंधों में चार रेड लाइन्स को पार नहीं किया जाना चाहिए। इन मुद्दों पर किसी भी तरह की चुनौती स्वीकार नहीं होगी। जिसके बाद से कूटनीति का बाजार गर्म हो गया है।
ट्रंप की चीन यात्रा से पहले ताइवान, व्यापार और तकनीक जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच देखने को मिल सकता है बड़ा कूटनीतिक…जानिए पूरी बातें यहां।
चार रेड लाइन्स पर चीन का अडिग
चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी है कि, हमारे चार संवेदनशील मुद्दे हैं, ताइवान, लोकतंत्र, मानवाधिकार और राजनीतिक प्रणाली और विकास का आधार। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार हस्तक्षेप चीन- अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। यहां चीन ने एक तरफ चेतावनी भी दी है। वहीं, दूसरी तरफ रिश्ता बेहतर होने की भी बात की है। दूतावास का कहना है कि दोनों देशों को स्थिर, रचनात्मक और रणनीतिक संबंध बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही, आपसी सम्मान और सहयोग को ही सही रास्ता बताया।
ताइवान मुद्दा बना सबसे बड़ा टकराव बिंदु
ताइवान को लेकर चीन का रुख पहले से ही बेहद सख्त है। बता दें कि बीजिंग इसे अपना हिस्सा मानता है। वहीं, अमेरिका ताइवान को सैन्य सहायता देता रहा है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। जिसपर चीन कई बार अपत्ति जता चुका है। चीन ने अमेरिका से ताइवान को हथियार बेचने का विरोध फिर दोहराया है। चीनी अधिकारियों ने इसे आंतरिक मामला बताया है और कहा है कि अमेरिका को अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए।
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अमेरिका का दोहरी स्थिति
वॉशिंगटन आधिकारिक तौर पर ताइवान की संप्रभुता पर कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लेता। लेकिन वह चीन के दावे को पूरी तरह स्वीकार भी नहीं करता। इसी बीच अमेरिकी कानून के तहत ताइवान को रक्षा के लिए हथियार दिए जाते हैं। हालही में अमेरिका प्रशासन ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज मंजूर किया था। जिसे अब तक सबसे बड़ा सैन्य सौदा करार दिया गया था। चीन ने अमेरिका के इस कदम को तनाव बढाने वाला बताया है।
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व्यापार, तकनीक और संसाधन भी एजेंडे में
इस शिखर वार्ता में राजनीतिक, व्यापार और तकनीक जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। रेयर अर्थ मेटल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रतिस्पर्धा और वैश्विक व्यापार विवाद प्रमुख विषय होंगे। दोनों देश आर्थिक प्रतिस्पर्धा में भी आमने-सामने हैं। ट्रंप 9 साल बाद चीन की दो दिवसीय यात्रा जा रहे हैं। इसबार उनकी प्राथमिकताएं समझौता तक ही सिमटी हुई बताई जा रही है।
