तेल-कीमतों-में-राहत-से-बाजार-में-तेजी-Sensex-250-अंक-चढ़ा

तेल कीमतों में राहत से बाजार में तेजी, Sensex 250 अंक चढ़ा

7 mins read
126 views
May 29, 2026

Stock Market India: बकरीद की छुट्टी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सावधानी भरे सकारात्मक रुख के साथ हुई। निवेशकों की नजर खास तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे हालात और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते पर बनी हुई है। इसी वजह से बाजार में सुबह से ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

भारतीय शेयर बाजार की आज की शुरुआत कैसी रही? पढ़ें Sensex, Nifty, GIFT Nifty, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की पूरी जानकारी।

शुक्रवार सुबह कारोबार शुरू होते ही BSE Sensex 76,000 के स्तर के ऊपर खुला और शुरुआती कारोबार में 250 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं एनएसई निफ्टी50 करीब 23,950 के स्तर के आसपास खुला और सुबह 9:15 बजे तक 30 अंकों से ज्यादा मजबूत दिखा। हालांकि बाजार की चाल पूरी तरह स्थिर नहीं रही और निवेशकों में सतर्कता साफ दिखाई दी।

GIFT Nifty ने दिए कमजोर शुरुआत के संकेत

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बावजूद GIFT निफ्टी ने बाजार के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत दिया। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट करीब 23,894 पर कारोबार करता दिखा, जो 100 अंकों से ज्यादा नीचे था। इससे साफ हुआ कि पश्चिम एशिया से आ रहे विरोधाभासी संकेतों के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

प्री-ओपन सत्र में सुबह करीब 9:01 बजे सेंसेक्स 76,551.18 पर था, जिसमें 683.38 अंकों यानी 0.90 प्रतिशत की बढ़त दिखी। वहीं निफ्टी50 23,779.20 पर कारोबार करता नजर आया, जो 127.95 अंक यानी 0.54 प्रतिशत नीचे था। इससे बाजार की शुरुआत मिश्रित रही।

अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों पर नजर

निवेशकों का ध्यान अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने मौजूदा संघर्षविराम (ट्रूस) को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई है ताकि बड़े समझौते की दिशा में बातचीत जारी रह सके। हालांकि, इस प्रस्ताव को अभी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मंजूरी का इंतजार है। दूसरी ओर, गुरुवार देर रात ईरान की ओर से मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आईं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ईरान ने कुवैत की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ड्रोन भी तैनात किए। इससे निवेशकों की चिंता बनी हुई है।

READ MORE: Amazon का Project Nara: AI से बनेंगे Prime Video के नए शो

एशियाई बाजारों में तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत जारी रहने की उम्मीद से एशियाई बाजारों में मजबूती देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी 2 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ। इससे पूरे एशियाई बाजार में सकारात्मक माहौल बना।

अमेरिकी बाजार और कच्चे तेल की चाल

अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गुरुवार को बढ़त दर्ज की गई। डॉव जोन्स 0.58 प्रतिशत, नैस्डैक 0.91 प्रतिशत और एसएंडपी 500 हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड करीब 93.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है तो तेल आपूर्ति को लेकर जोखिम घट सकता है। इसका असर भारतीय बाजार, महंगाई और रुपये की चाल पर भी पड़ सकता है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Gold Rate 29 May
Previous Story

Gold Rate 29 May: भारत में जानें 18K, 22K और 24K ताजा भाव

Vivo-X300-FE-vs-X200
Next Story

Vivo X300 FE खरीदें या X200 FE? जानें फीचर्स में कौन है बेस्ट

Latest from Latest news

Crypto DAO में 8.2M डॉलर की सेंध, BNB Chain का सुरक्षा बग बेनकाब

Crypto DAO में 8.2M डॉलर की सेंध, BNB Chain का सुरक्षा बग बेनकाब

Crypto DAO exploit ने BNB Chain की सुरक्षा पर फिर खड़े किए सवाल, जानें कैसे बिना जीरो डे या प्राइवेट की चोरी के करोड़ों डॉलर की सेंध लगी। Blockchain Security: क्या करोड़ों डॉलर की क्रिप्टो चोरी के लिए किसी बेहद खतरनाक हैकर या नई तकनीक की जरूरत होती है? Crypto DAO Exploit ने इसका जवाब चौंकाने वाले तरीके से दिया। 28 जुलाई 2026 को BNB Chain पर Crypto DAO से जुड़े Pro Token में हमला हुआ और करीब 8.2 मिलियन डॉलर का USDT एक हमलावर वॉलेट में पहुंच गया।  साइबर सिक्योरिटी फर्म Blockaid ने इस सक्रिय हमले की जानकारी दी। हमलावर ने किसी नए जीरो डे या चोरी की गई प्राइवेट की का सहारा नहीं लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसी वॉल्ट फंक्शन खुली थी, जिसे कोई भी व्यक्ति कॉल कर सकता था। यही Access-Control की कमी हमले की सबसे बड़ी वजह बनी।  Crypto DAO Exploit में कैसे हुआ हमला?  हमले के बाद करीब 8.2 मिलियन डॉलर का USDT exploiter wallet 0x427671b2C8e91034A91FE698F9B7259b2345F45D में ट्रांसफर हुआ। इसके अलावा तीन जुड़े रिसीविंग एड्रेस में भी रकम पहुंची। इन तीन पतों पर करीब 2.68 मिलियन डॉलर, 2.69 मिलियन डॉलर और 2.78 मिलियन डॉलर की रकम रखी गई। DeFiLlama ने भी इस घटना को उसी दिन Protocol Logic (Solidity)
Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

क्या EMI नहीं भरने पर iPhone के ऐप्स बंद हो जाएंगे? Apple ने Restricted Mode की खबरों को खारिज किया  Apple Upgrade: क्या iPhone की EMI नहीं भरने पर आपका फोन लॉक हो जाएगा? इस सवाल पर Apple ने अब बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने साफ कहा है कि Apple Upgrade Program के तहत भुगतान चूकने पर डिवाइस के फीचर्स को सीमित करने वाला कोई Restricted Mode नहीं होगा।   Apple के इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि EMI नहीं भरने पर iPhone, iPad, Mac या Apple Watch का इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, ऐसे मामलों को मौजूदा फाइनेंसिंग और लीज खत्म करने की नीतियों के तहत संभाला जाएगा।  Apple Upgrade Program में Restricted Mode की चर्चा क्यों हुई?  हाल ही में iOS 27 बीटा में एक फीचर को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें App Managed Feature देखा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह फीचर फाइनेंसिंग पार्टनर्स को डिवाइस की स्थिति की समय-समय पर जांच करने की सुविधा दे सकता है। इसके बाद ऐसी अटकलें तेज हो गईं कि Apple भुगतान नहीं करने वाले ग्राहकों के डिवाइस पर Restricted Mode लागू कर सकता है। इस मोड में कथित तौर पर सिर्फ Phone, Settings, Clock, Wallet और App
भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों का बिल आगे बढ़ा, जानें भारत क्यों निशाने पर है और 100% संभावित टैरिफ का क्या असर पड़ सकता है।  India-US Tariff: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल सीनेट में आगे बढ़ गया है। मंगलवार को हुए प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया। इसमें रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है।  US Russia Sanctions Bill में भारत क्यों आया निशाने पर?  इस प्रस्ताव का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है। बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देगा, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ताजा समझौते के मुताबिक, संभावित टैरिफ का दायरा रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों तक सीमित किया गया है। भारत और चीन इस सूची में महत्वपूर्ण देश माने जा रहे हैं।  भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर अमेरिकी कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नया दबाव बन सकता है।  READ MORE: हैदराबाद के टॉप 10 AI स्टार्टअप्स 2026   भारत पहले से झेल रहा 50% टैरिफ का दबाव  भारत पहले ही अमेरिकी टैरिफ को लेकर दबाव में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50% तक पहुंच गया था। अब नया प्रतिबंध विधेयक सामने आने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित कानून में राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध या टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।  रूस से तेल खरीद पर क्या होगा असर?  भारत के लिए रूसी तेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए एक अहम विकल्प रहा है। अगर अमेरिका इस बिल को कानून का रूप देता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है और कई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस की ऊर्जा आय घटेगी और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव पड़ेगा।  READ MORE: सेंसेक्स

Don't Miss