Union Budget 2026: यूनियन बजट 2026 से पहले देश की टेक इंडस्ट्री सरकार से कई अहम राहतों की उम्मीद कर रही है। IT और टेक कंपनियों के प्रमुख उद्योग संगठन Nasscom ने टैक्स और नियमों में कुछ बड़े बदलावों की मांग की है। इनका सीधा असर स्टार्टअप्स, क्लाउड कंपनियों और पूरे डिजिटल इकोसिस्टम पर पड़ेगा।
यूनियन बजट 2026 से पहले Nasscom ने सरकार से ESOP टैक्स राहत, विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए डेटा सेंटर नियमों में स्पष्टता और टेक कंपनियों के लिए टैक्स बोझ कम करने की मांग की है।
विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए टैक्स नियम साफ करने की मांग
Nasscom ने सरकार से कहा है कि यह साफ किया जाए कि अगर कोई विदेशी क्लाउड सेवा कंपनी भारत में किसी डेटा सेंटर ऑपरेटर से सिर्फ होस्टिंग या को-लोकेशन सेवाएं लेती है, तो इसे भारत में उसका ‘स्थायी व्यवसाय’ न माना जाए।
संस्था का कहना है कि भारतीय डेटा सेंटर ऑपरेटर को जो भुगतान किया जाता है, वही भारत में होने वाले सभी इंफ्रास्ट्रक्चर कामों को कवर करता है। डेटा सेंटर ऑपरेटर ही लोकल स्टाफ रखता है और मशीनें व सर्वर संभालता है। विदेशी क्लाउड कंपनी न तो उस जगह को कंट्रोल करती है और न ही वहां बैठकर कारोबार चलाती है। वह सिर्फ अपने ग्लोबल सिस्टम से दूर बैठकर सर्वर से जुड़ती है इसलिए Nasscom चाहती है कि आयकर कानून में साफ लिखा जाए ताकि विदेशी क्लाउड कंपनियों पर गलती से अतिरिक्त टैक्स बोझ न पड़े।
सभी स्टार्टअप्स को ESOP टैक्स राहत देने की मांग
Nasscom की दूसरी बड़ी मांग ESOP से जुड़ी है। अभी ESOP टैक्स डिफरमेंट की सुविधा सिर्फ उन्हीं स्टार्टअप्स को मिलती है, जिनके पास Inter-Ministerial Board का सर्टिफिकेट है। Nasscom चाहती है कि यह सुविधा सभी DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को मिले।
इस समय भारत में 1.59 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स DPIIT से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन IMB सर्टिफिकेशन 4,000 से भी कम स्टार्टअप्स के पास है। संगठन का कहना है कि अगर सभी स्टार्टअप्स को यह राहत मिले, तो वह बड़े कॉरपोरेट्स की तरह टैलेंट को आकर्षित कर पाएंगे। साथ ही, ESOP खर्च को आयकर कानून की धारा 37 के तहत डिडक्शन की अनुमति देने की भी मांग की गई है।
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इंडस्ट्री की ग्रोथ और AI से नए मौके
Nasscom के पब्लिक पॉलिसी वाइस प्रेसिडेंट आशीष अग्रवाल के मुताबिक, यह बजट टेक इंडस्ट्री के लिए एक अहम समय पर आ रहा है। भारत की IT इंडस्ट्री का आकार पिछले साल 280 अरब डॉलर तक पहुंच गया था और इस साल यह 300 अरब डॉलर के करीब है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में ग्लोबल बाजारों की चुनौतियों के कारण ग्रोथ थोड़ी धीमी रही है। इसके बावजूद AI के कारण नए मौके तेजी से बन रहे हैं। साथ ही, घरेलू बाजार की ग्रोथ एक्सपोर्ट्स से तेज है, भले ही उसका कुल आकार अभी छोटा हो।
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GST और इनकम टैक्स में राहत की मांग
IT, ITe और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कैश फ्लो बहुत अहम होता है। Nasscom ने कहा है कि अपील के दौरान विवादित टैक्स मांग पर 20% प्री-डिपॉजिट की शर्त कंपनियों की वर्किंग कैपिटल पर भारी दबाव डालती है इसलिए इसे घटाकर 10% करने और एक अधिकतम सीमा तय करने की मांग की गई है, जैसा GST कानून में पहले किया जा चुका है।
रिफंड एडजस्टमेंट और मर्जर नियमों में बदलाव
Nasscom ने यह भी कहा है कि जिन टैक्स मांगों पर अपील के दौरान स्टे मिल चुका है, उनके खिलाफ टैक्स रिफंड एडजस्ट नहीं किए जाने चाहिए। अभी ऐसा होने से कंपनियों की लिक्विडिटी पर असर पड़ता है। इसके अलावा, संस्था ने सुझाव दिया है कि मर्जर और अमलगमेशन के मामलों में सभी कंपनियों को पुराने घाटे और अनएब्जॉर्ब्ड डिप्रिसिएशन को आगे ले जाने की अनुमति मिले। अभी यह सुविधा सिर्फ कुछ खास सेक्टर्स तक सीमित है, जबकि टेक सेक्टर में भी मर्जर तेजी से बढ़ रहे हैं।
