Startup Funding News : भारतीय स्पेस टेक स्टार्टअप Pixxel ने 100 मिलियन डॉलर की Series C फंडिंग जुटाई है। कंपनी इस रकम से भारत और अमेरिका में सैटेलाइट उत्पादन बढ़ाएगी। इस फंडिंग राउंड की अगुवाई सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी Temasek और ब्रिटिश वेंचर कैपिटल फर्म Seraphim ने की है। कंपनी के मुताबिक यह किसी भारतीय स्पेस टेक कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा एकल फंडिंग राउंड है।
कंपनी की कुल फंडिंग 195 मिलियन डॉलर हुई
ताजा फंडिंग के बाद Pixxel की कुल फंडिंग बढ़कर 195 मिलियन डॉलर हो गई है। इस राउंड में पुराने निवेशक Radical Ventures और growX Ventures भी शामिल हुए। इसके अलावा 360 ONE Asset और IMM Investment ने पहली बार निवेश किया है। टेक दिग्गज Google भी Pixxel का निवेशक है।
कंपनी अब भारत में अपना Gigapixxel कारखाना शुरू करने की तैयारी कर रही है। यह सुविधा अगले कुछ महीनों में शुरू हो सकती है। इससे भारत में सालाना सैटेलाइट उत्पादन क्षमता 25 से बढ़कर 100 सैटेलाइट हो जाएगी। Pixxel के संस्थापक और CEO Awais Ahmed ने SpaceNews को बताया कि कंपनी अमेरिका के लॉस एंजिल्स में भी उत्पादन बढ़ा रही है।
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Firefly के बाद Honeybee पर बड़ा दांव
Pixxel ने पिछले साल अपने पहले 6 Firefly सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में भेजे थे। ये सैटेलाइट करीब 5 मीटर रिजॉल्यूशन पर दृश्य और नजदीकी इन्फ्रारेड तरंगों में 135 स्पेक्ट्रल बैंड की तस्वीरें लेते हैं। अब कंपनी अगली पीढ़ी के Honeybee सैटेलाइट पर काम कर रही है। इसका वजन करीब 200 किलोग्राम होगा। यह शॉर्टवेव इन्फ्रारेड तक इमेजिंग करेगा और करीब 250 स्पेक्ट्रल बैंड कवर करेगा।
कंपनी अगले साल 6 और Firefly सैटेलाइट भेजने की योजना बना रही है। पहला Honeybee सैटेलाइट 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च होने की उम्मीद है। इसके बाद 2028 की शुरुआत तक 5 और Honeybee तैनात किए जाएंगे।
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अमेरिका में भी बढ़ेगी मौजूदगी
पहला Honeybee सैटेलाइट अमेरिका में बनाया जाएगा। कंपनी के मुताबिक उसके सबसे ज्यादा ग्राहक अमेरिका में हैं। Pixxel को अमेरिकी सरकार से पहले ही 2 कॉन्ट्रैक्ट मिल चुके हैं। इनमें एक NASA के Commercial SmallSat Data Acquisition Program के तहत है। दूसरा National Reconnaissance Office का Strategic Commercial Enhancements कॉन्ट्रैक्ट है। इसके तहत व्यावसायिक हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा का मूल्यांकन और इस्तेमाल किया जाएगा।
Pixxel अब सिर्फ सैटेलाइट बनाने तक सीमित नहीं है। कंपनी Aurora नाम का Earth intelligence सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी चला रही है। नई फंडिंग से Honeybee constellation, हाई-रिजॉल्यूशन ऑप्टिकल सैटेलाइट और Aurora का विकास आगे बढ़ाया जाएगा।
