North Korea Crypto Hack: आज के समय में साइबर हमले और क्रिप्टो चोरी सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं। हाल ही में नोर्थ कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इसी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर बड़े क्रिप्टो हैक का आरोप लगाया, लेकिन उत्तर कोरिया ने इसे पूरी तरह से गलत बताया है।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच क्रिप्टो हैक को लेकर तनाव बढ़ गया है। 290 मिलियन डॉलर KelpDAO हैक, Lazarus Group और दोनों देशों के आरोप-प्रत्यारोप की पूरी जानकारी जानें।
KP उत्तर कोरिया का सख्त बयान
उत्तर कोरिया ने इन आरोपों को ‘झूठा और बेबुनियाद’ बताया गया है। देश के विदेश मंत्रालय ने सरकारी मीडिया Korean Central News Agency के जरिए बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि यह सब उनकी छवि खराब करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साजिश है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि वह इस मामले को नजरअंदाज नहीं करेंगे और अपने देश के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
US अमेरिका पर पलटवार
उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिका साइबर मामलों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। बयान में कहा गया कि अमेरिका खुद दुनिया के IT सिस्टम पर मजबूत पकड़ रखता है और कई बार साइबर हमलों में शामिल रहा है, लेकिन खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश करता है। उत्तर कोरिया ने इसे ‘साइबर नैरेटिव का गलत इस्तेमाल’ बताया।
290 मिलियन डॉलर KelpDAO हैक क्या है?
यह पूरा विवाद पिछले महीने हुए एक बड़े क्रिप्टो हैक के बाद शुरू हुआ। DeFi प्लेटफॉर्म KelpDAO से करीब 290 मिलियन डॉलर की चोरी हो गई। यह 2026 के सबसे बड़े क्रिप्टो हैक्स में से एक माना जा रहा है। इस हमले में ‘RPC poisoning’ नाम की एक एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे सिस्टम को धोखा देकर फंड्स निकाल लिए गए।
Lazarus Group पर शक
इस हैक के बाद शक Lazarus Group पर गया। यह एक कुख्यात हैकर ग्रुप है, जिसे पहले भी कई बड़े साइबर हमलों से जोड़ा गया है। इस ग्रुप का नाम 2014 के Sony Pictures हैक, 2016 के Bangladesh बैंक चोरी और 2017 के WannaCry रैनसमवेयर हमले में भी सामने आया था। हालांकि, उत्तर कोरिया इन सभी आरोपों को लगातार नकारता रहा है।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
अमेरिकी एजेंसियां पहले भी उत्तर कोरिया पर ऐसे आरोप लगा चुकी हैं। 2025 में Federal Bureau of Investigation ने लगभग 1.5 बिलियन डॉलर के Bybit हैक के लिए ‘TraderTraitor; नाम के समूह को जिम्मेदार बताया था। अमेरिका का कहना है कि इस तरह की साइबर चोरी से मिलने वाला पैसा उत्तर कोरिया अपने हथियार कार्यक्रमों में इस्तेमाल करता है।
READ MORE: जापान की दिग्गज Rakuten ने लॉयल्टी पॉइंट्स को XRP पेमेंट में बदला
बढ़ता तनाव और बड़ा असर
भले ही कई देशों को उत्तर कोरिया पर शक हो, लेकिन वह इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। उसका कहना है कि यह सब उसे कमजोर करने की रणनीति है। अब जैसे-जैसे क्रिप्टो मार्केट और डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराध और राजनीति के बीच टकराव भी बढ़ता जा रहा है।
READ MORE: चुनावी नतीजों से शेयर बाजार में उछाल, Sensex-Nifty में उछाल
क्या समझना जरूरी है?
यह मामला सिर्फ एक हैक का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता यह विवाद आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
