US Court Ruling: अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट ने क्रिप्टो से जुड़े एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के जज स्टेनली ब्लुमेनफेल्ड जूनियर ने 16 अप्रैल को Naeem Azad et al. v. Caitlyn Jenner et al. केस में प्रतिवादियों की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामला खारिज कर दिया। उसी दिन अंतिम निर्णय भी जारी हुआ, जिससे यह फेडरल केस पूरी तरह बंद हो गया। इस फैसले को पॉल ग्रेवाल ने X पर शेयर किया। उन्होंने कहा है कि यह फैसला SEC के पहले के उस रुख के खिलाफ जाता है, जिसमें कई क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स को सिक्योरिटी माना जा रहा था।
अमेरिका की अदालत ने क्रिप्टो केस में बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें मेमेकॉइन को सिक्योरिटी मानने से इनकार किया गया, जानें पूरा मामला।
कोर्ट ने क्या कहा
यह मामला 1946 के प्रसिद्ध SEC v. W.J. Howey Co. पर आधारित ‘Howey Test’ से जुड़ा था। इस टेस्ट के अनुसार, किसी एसेट को निवेश अनुबंध मानने के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि निवेश एक ‘कॉमन एंटरप्राइज’ में किया गया हो और उससे मुनाफे की उम्मीद हो। जज ब्लूमेनफेल्ड ने साफ कहा है कि मुख्य वादी ली ग्रीनफील्ड यह साबित नहीं कर पाए कि निवेशकों ने अपने पैसे को मिलाकर कोई साझा बिजनेस बनाया था। सिर्फ टोकन खरीदना ‘कॉमन एंटरप्राइज’ नहीं माना जा सकता।
इसी वजह से कोर्ट ने सिक्योरिटी से जुड़े सभी फेडरल दावों को हमेशा के लिए खारिज कर दिया। साथ ही, वादी को तीसरी बार संशोधित शिकायत दाखिल करने की अनुमति भी नहीं दी गई। हालांकि, कैलिफोर्निया के राज्य कानून के तहत धोखाधड़ी और अन्य दावे बिना पूर्वाग्रह के खारिज किए गए हैं। इसका मतलब है कि वादी इन्हें राज्य अदालत में दोबारा दायर कर सकते हैं।
केस की पृष्ठभूमि
यह केस नवंबर 2024 में दायर किया गया था। केटलिन जेनर ने 2024 को Solana ब्लॉकचेन पर ‘JENNER’ नाम का टोकन लॉन्च किया था। बाद में इसे Ethereum पर भी शिफ्ट किया गया। इस टोकन की मार्केट वैल्यू जून 2024 में करीब 7.5 मिलियन डॉलर तक पहुंची, लेकिन बाद में यह लगभग शून्य हो गई। निवेशकों का आरोप था कि जेनर ने अपने सोशल मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया।
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कोर्ट ने क्यों ठुकराया दावा
वादी पक्ष का कहना था कि 3% ट्रांजैक्शन फीस का इस्तेमाल टोकन बायबैक, मार्केटिंग और अन्य कामों में होगा, जिससे निवेशकों को फायदा मिलेगा, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था स्पष्ट नहीं थी और इसका निवेशकों के मुनाफे से सीधा संबंध साबित नहीं होता। साथ ही, कुछ योजनाएं बाद में घोषित की गई थीं और लागू भी नहीं हुईं।
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फैसले का असर
इस फ़ैसले को क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए काफ़ी अहम माना जा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि हर मीमकॉइन को ‘सिक्योरिटी’ के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया जाएगा। हालांकि, यह फैसला अन्य अदालतों या SEC पर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इससे भविष्य के मामलों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, इस फैसले के खिलाफ कोई अपील सामने नहीं आई है, लेकिन वादी के पास राज्य अदालत में केस दोबारा दायर करने का विकल्प अभी भी मौजूद है।
