Dubai Real Estate: आज भारतीय निवेशक दुबई में सिर्फ नौकरी या कारोबार के लिए नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर घर और प्रॉपर्टी खरीदने के लिए भी पहुंच रहे हैं। पांच साल की तेज़ रैली के बाद दुबई के प्रॉपर्टी बाजार की रफ्तार भले कुछ धीमी हुई हो, लेकिन भारतीय निवेशकों का भरोसा पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में राहत, बेहतर रिटर्न और गोल्डन वीजा जैसी सुविधाएं इसकी सबसे बड़ी वजह हैं।
दुबई में भारतीयों का प्रॉपर्टी निवेश लगातार बढ़ रहा है, जानिए बाजार की रफ्तार क्यों धीमी हुई, गोल्डन वीजा का फायदा और निवेशकों के लिए क्या हैं नए मौके।
दुबई का प्रॉपर्टी बाजार क्यों हुआ थोड़ा शांत?
पिछले 5 साल में दुबई के रियल एस्टेट बाजार ने शानदार तेजी देखी। कई इलाकों में मकानों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। अब बड़ी संख्या में नए प्रोजेक्ट लॉन्च हो रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी है। इसी कारण पहले जहां प्रॉपर्टी की कीमतें सालाना 17% से 18% तक बढ़ रही थीं, अब यह बढ़ोतरी घटकर करीब 4% से 5% रह गई है। विशेषज्ञ इसे बाजार में गिरावट नहीं, बल्कि सामान्य स्थिति में वापसी मान रहे हैं। इससे खरीदारों को बेहतर विकल्प और आकर्षक डील मिलने लगी हैं।
भारतीय निवेशकों की पहली पसंद क्यों बना दुबई?
भारतीय निवेशकों के लिए दुबई कई वजहों से आकर्षक बन गया है। सबसे बड़ी वजह वहां मिलने वाला अच्छा किराया रिटर्न है। इसके अलावा यूएई में व्यक्तिगत आयकर नहीं लगता, जिससे निवेश का फायदा और बढ़ जाता है। गोल्डन वीजा योजना भी निवेशकों को लंबी अवधि तक रहने का मौका देती है। मजबूत कानून व्यवस्था, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित निवेश का माहौल भी भारतीयों का भरोसा बढ़ा रहा है। जानकारी के मुताबिक भारतीय निवेशकों ने अब तक करीब 85,000 करोड़ से 95,000 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीद ली है।
READ MORE: Apple ने CCI पर लगाए गंभीर आरोप, जांच को बताया गलत
विदेशी खरीदारों में भारतीय सबसे आगे
Knight Frank और अन्य प्रॉपर्टी सलाहकार कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय लगातार दूसरे साल दुबई में सबसे बड़े विदेशी प्रॉपर्टी खरीदार बने हुए हैं। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों के हाई नेटवर्थ निवेशक लग्जरी अपार्टमेंट और विला खरीद रहे हैं। वहीं अब मध्यम वर्ग के परिवार भी भविष्य को ध्यान में रखते हुए वहां फ्लैट खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। ईरान-इजराइल तनाव के दौरान भी कई वैश्विक निवेशकों ने दुबई को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश केंद्र माना। इसका फायदा दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर को मिला और भारतीय निवेशकों ने भी खरीदारी जारी रखी।
आगे क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में दुबई की प्रॉपर्टी में भारतीय निवेश और तेजी से बढ़ सकता है। इससे यूएई में भारतीय निवेशकों और कारोबारी समुदाय की आर्थिक मौजूदगी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि दुबई की कुल कितनी प्रॉपर्टी भारतीयों के पास है, क्योंकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन विदेशी खरीदारों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
READ MORE: Zeta फाउंडर भाविन तुराखिया ने लॉन्च किया Neo, 30 मिलियन डॉलर का निवेश
दुबई का प्रॉपर्टी बाजार अब पहले जैसी तेज़ रफ्तार पर नहीं है, लेकिन भारतीय निवेशकों के लिए मौके अभी भी मजबूत बने हुए हैं। टैक्स में राहत, गोल्डन वीजा और बेहतर रिटर्न जैसी सुविधाएं आगे भी निवेश को बढ़ावा दे सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी वित्तीय योजना का आकलन करने की सलाह दे रहे हैं।
