Neo AI Startup: क्या ऑफिस में अलग-अलग ऐप्स के बीच काम करने की झंझट अब खत्म होने वाली है? भारत के जाने-माने उद्यमी और Zeta के सह-संस्थापक भाविन तुराखिया ने इसी चुनौती का समाधान देने के लिए नया AI-नेटिव वर्क प्लेटफॉर्म Neo लॉन्च किया है। उन्होंने इस स्टार्टअप में अपनी जेब से 30 मिलियन डॉलर (करीब 250 करोड़) का निवेश किया है। फिलहाल, कंपनी का फोकस मिड-मार्केट कंपनियों और नॉलेज-वर्क सेक्टर पर रहेगा।
क्या है Neo AI PlatfZeta के सह-संस्थापक भाविन तुराखिया ने 30 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ AI प्लेटफॉर्म Neo किया लॉन्च।orm?
Neo एक ऐसा वर्कस्पेस है, जहां टास्क, डॉक्युमेंट, कंपनी की जानकारी और AI एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे। इसका उद्देश्य कर्मचारियों और AI एजेंट्स को साथ मिलकर बेहतर तरीके से काम करने में मदद करना है। कंपनी का मानना है कि आज ज्यादातर ऑफिस टूल्स में AI केवल एक अतिरिक्त फीचर है, जबकि Neo को शुरुआत से ही AI-केंद्रित सोच के साथ तैयार किया गया है।
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क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
Neo में कई टूल्स शामिल किए गए हैं, जो रोजमर्रा के काम को आसान बनाएंगे।
- Tasket – प्रोजेक्ट और टास्क मैनेजमेंट
- Studio – डॉक्युमेंट, स्प्रेडशीट और डायग्राम
- Drive – फाइल शेयरिंग और स्टोरेज
- Friday – AI असिस्टेंट, जो सलाहकार, सहकर्मी और ऑटोमेटेड एजेंट की तरह काम करेगा
इसके अलावा Neo को 1,000 से ज्यादा बाहरी एप्लिकेशन से जोड़ा जा रहा है, जिनमें HR, CRM, फाइनेंस, भर्ती और मार्केटिंग टूल शामिल हैं।
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अभी कहां हो रहा है इस्तेमाल?
Neo फिलहाल कंपनी के अंदर और भाविन तुराखिया की दूसरी कंपनियों Zeta, Radix और Titan में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर काम की शुरुआत करीब 8 से 12 महीने पहले हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि केवल 18 इंजीनियरों की टीम ने पहला प्रोडक्ट महज 6 सप्ताह में तैयार कर लिया। कंपनी का दावा है कि AI की मदद से काम की रफ्तार पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है।
कब मिलेगा आम यूजर्स को?
कंपनी अगस्त-सितंबर में चुनिंदा यूजर्स के लिए Closed Beta शुरू करेगी। इसके बाद दिसंबर 2026 या अगले साल की पहली तिमाही में सार्वजनिक लॉन्च की योजना है। भाविन तुराखिया का कहना है कि 30 मिलियन डॉलर की शुरुआती फंडिंग से कंपनी के पास कम से कम 2 से 3 साल तक काम करने के लिए पर्याप्त पूंजी है। आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर बाहरी निवेश भी लिया जा सकता है।
