Crude Oil Price: क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है? ताज़ा अपडेट में Crude Oil Price में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 2% तक लुढ़क गईं। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम होना माना जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज, जानिए ब्रेंट और WTI क्रूड क्यों सस्ते हुए और इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 73.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं WTI क्रूड भी 70.42 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, ओमान के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, लेकिन बाजार ने इसे बड़े सप्लाई संकट के रूप में नहीं देखा। निवेशकों का मानना है कि फिलहाल तेल की आवाजाही सामान्य बनी हुई है।
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सप्लाई सुधरने से बाजार को मिली राहत
विशेषज्ञों के अनुसार, संघर्षविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या बढ़ी है। इसी वजह से सप्लाई रुकने का खतरा पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है। हालांकि, जहाजों की आवाजाही अभी भी सामान्य औसत 125 जहाज प्रतिदिन से कम है, लेकिन स्थिति पहले से बेहतर मानी जा रही है। इसी कारण इस सप्ताह ब्रेंट और WTI दोनों में करीब 7% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
भारत के लिए क्या है इसका मतलब?
भारत का कच्चे तेल का आयात बिल भी धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। जून में भारतीय क्रूड बास्केट का औसत भाव 86.31 डॉलर प्रति बैरल रहा। तुलना करें तो मई में यह 106.23 डॉलर और अप्रैल में 114.48 डॉलर प्रति बैरल था। इससे आने वाले समय में तेल कंपनियों की लागत घट सकती है। अगर वैश्विक बाजार में यही रुझान बना रहता है तो घरेलू ईंधन कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
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फिलहाल Crude Oil Price में आई गिरावट वैश्विक बाजार के लिए राहत की खबर है। हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। यदि सप्लाई सामान्य रहती है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
