AI Business Insurance: आजकल कंपनियां अपने कई काम AI के जरिए कर रही हैं। AI अपने आप फैसले ले सकता है और काम कर सकता है, लेकिन इससे गलतियां भी हो सकती हैं। इसी वजह से इंस्योरेंस कंपनियां अब अपनी पॉलिसी बदल रही हैं। कुछ कंपनियां ऐसी पॉलिसी बना रही हैं, जो AI की गलती से होने वाले नुकसान को कवर करें। वहीं, कुछ कंपनियां AI की गलती को बिल्कुल कवर नहीं करतीं।
कंपनियों में AI बढ़ रहा है और इंस्योरेंस कंपनियां भी अपनी पॉलिसी बदल रही हैं। अब कुछ पॉलिसी AI की गलती को कवर करती हैं, जबकि कुछ इसे पूरी तरह बाहर रखती हैं।
AI से होने वाले नुकसान और चुनौतियां
विशेषज्ञ बताते हैं कि AI का मकसद अक्सर इंसानों की निगरानी और मदद को कम करना होता है, लेकिन इससे पुराने इंस्योरेंस प्रोडक्ट्स के नियम कायदे पर दबाव बढ़ जाता है। AI अभी भी गलती कर सकता है। एक आम गलती है ‘हैलुसिनेशन’। जब AI गलत जानकारी को पूरी तरह सही लगाकर दिखाता है।
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पुराने तरीके और नई पॉलिसी
पहले AI से हुई गलती को अक्सर मौजूदा पॉलिसी में छुपे हुए साइलेंट कवरेज के तहत शामिल किया जाता था, लेकिन अब यह तरीका हमेशा काम नहीं करेगा। इंस्योरेंस कंपनियां अब धीरे-धीरे AI को सीधे पॉलिसी में शामिल कर रही हैं। कुछ कंपनियां AI की गलती को पूरी तरह बाहर रख रही हैं। वहीं, कुछ पॉलिसी में AI के गलत काम या हैलुसिनेशन जैसी समस्याओं को कवर किया जा रहा है।
AI कवरेज के उदाहरण
Armilla जैसी कंपनियां AI मॉडल को टेस्ट करती हैं और कुछ क्षेत्रों में कवरेज ही नहीं देती, जैसे मेडिकल डायग्नॉस्टिक्स या मानसिक स्वास्थ्य ऐप। Munich Re भी AI कवरेज देती है, लेकिन कहती है कि AI में हमेशा स्टैटिस्टिकल अनसर्टेन्टी होती है इसलिए गलती पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती।
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भविष्य और बाजार
विश्लेषकों का अनुमान है कि वैश्विक AI इंस्योरेंस मार्केट 2032 तक 4.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
