OpenAI CEO और Zoho संस्थापक की AI पर अलग राय

OpenAI CEO और Zoho संस्थापक की AI पर अलग राय

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February 23, 2026

Machine vs Human: OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में भारत में हुए एक कार्यक्रम में कहा कि एडवांस्ड AI मॉडल को ट्रेन करने में जितनी एनर्जी खर्च होती है, उसकी तुलना किसी इंसान को स्मार्ट बनाने में लगने वाले संसाधनों से की जा सकती है। ऑल्टमैन के अनुसार, इंसान को शिक्षित और तैयार करने में लगभग 20 साल लगते हैं। उस दौरान जितना भोजन और संसाधन खपत होता है, उसकी तुलना AI ट्रेनिंग की ऊर्जा से की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि AI की ऊर्जा खपत बढ़ रही है, लेकिन इसका समाधान साफ एनर्जी सोर्स का इस्तेमाल करना होना चाहिए न कि AI की प्रगति को रोकना।

AI और बड़ी तकनीक पर चर्चा: सैम ऑल्टमैन ऊर्जा उपयोग पर जोर देते हैं, जबकि श्रीधर वेम्बु तकनीक को इंसानियत पर हावी न होने वाला उपकरण मानते हैं।

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Zoho संस्थापक श्रीधर वेम्बु का अलग नजरिया

वहीं, Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु का मानना है कि तकनीक को इंसान के बराबर नहीं समझा जाना चाहिए। वेम्बु ने X पर लिखा है कि मैं नहीं चाहता कि हम तकनीक को इंसान के बराबर समझें। मैं यह देखना चाहता हूं कि तकनीक हमारी जिंदगी पर हावी न हो, बल्कि बैकग्राउंड में काम करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI केवल सहायक उपकरण होना चाहिए न कि जीवन में हावी शक्ति। मशीनों को इंसानों के स्तर पर नहीं रखा जाना चाहिए और तकनीक इंसानियत की सेवा में रहनी चाहिए। ये टिप्पणियां इस बात को दिखाती हैं कि तेजी से बढ़ रही AI तकनीक के सांस्कृतिक और नैतिक प्रभावों को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों में चिंता बढ़ रही है।

बड़ी तकनीक कंपनियों की तुलना

श्रीधर वेम्बु ने हाल ही में बड़ी तकनीक कंपनियों जैसे Google और Meta की तुलना East India Company से की है। वेम्बु ने लिखा कि Big tech अब कई देशों से बड़ी है। इन्हें East India Company की तरह सोचें। उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह टिप्पणी उस पोस्ट के जवाब में थी जिसमें Google ने एक ही दिन में 32 अरब डॉलर कर्ज जुटाया और 100 साल का बॉन्ड जारी किया।

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इस पोस्ट में कहा गया है कि Google ने जो राशि जुटाई है वह भारत जैसे बड़े देश के लिए कई महीनों में जुटाई जाने वाली राशि के बराबर है। साथ ही, Google ने 1 बिलियन यूरो का 100 साल का बॉन्ड जारी किया, जो भारत के सबसे लंबे सरकारी बॉन्ड से भी लंबा है। यह दिखाता है कि बड़ी तकनीक कंपनियां अब राज्यों जैसी ताकत रखती हैं, चाहे वह धन जुटाने की क्षमता हो या लंबी अवधि वाले निवेश निर्णय।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

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