ChatGPT Trusted Contact: ओपनएआई ChatGPT में जबरदस्त फीचर लाने जा रहा है। जो अब चैटजीपीटी के सवाल-जबाव देने की परंपरा को एक कदम और आगे बढ़ा देगा। दरअसल, कंपनी ने इसमें नया Trusted Contact फीचर जोड़ा है। इस फीचर का मकसद मुश्किल मानसिक परिस्थितियों में यूजर्स को मदद दिलाना है। कंपनी इसे सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम मान रही है। तो आइए जानते हैं इस नए फीचर के खूबियां के बारे में विस्तार से।
ChatGPT का नया सुरक्षा फीचर अब मुश्किल परिस्थितियों में यूजर्स को वास्तविक मदद से जोड़ने की कोशिश करेगा। जानें कैसे करेगा काम।
क्यों लाया गया यह फीचर?
पिछले कुछ समय में एआई चैटबॉट्स को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। कई यूजर्स मानसिक तनाव और अकेलेपन के दौरान चैटडीपीटी से लगातार बातचीत कर रहे थे। कुछ मामलों में आत्म-हानि जैसी घटनाओं के बाद ओपन एआई की आलोचना भी हुई। इसी वजह से कंपनी ने नया सुरक्षा फीचर पेश किया है। जिसे व्यस्क यूजर्स उपयोग कर सकेंगे। वे अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जोड़ सकता है। यह परिवार के सदस्य, दोस्त या करीबी व्यक्ति हो सकता है। इसे जोड़ने के बाद उस व्यक्ति को आमंत्रण भेजा जाएगा। अब उनके ऊपर निर्भर करता है कि वो इसे स्वीकार करे या फिर तिरस्कार करे।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
इस फीचर एक्टिव होने के बाद चैटजीपीटी बातचीत के दौरान संवेदनशील संकेतों पर नजर रखेगा। अगर सिस्टम को लगे कि यूजर गंभीर मानसिक परेशानी या आत्म-हानि से जुड़ी बातें कर रहा है, तो पहले यूजर को चेतावनी दी जाएगी। अगर यूजर्स उसे नहीं समझे या फिर उसे इग्नोर कर दे तो यह फीचर ट्रस्टेड कॉन्टेक्ट को अलर्ट भेज सकता है।
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प्राइवेसी का भी रखा गया पूरा ध्यान
ओपनएआई ने साफ किया है कि यूजर की निजी चैट शेयर नहीं होगी। ट्रस्टेड कॉन्टेक्ट को चैट का ट्रांसक्रिप्ट या पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलेगा। उसे केवल एक नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इसमें यूजर से संपर्क करने या हालचाल लेने की सलाह दी जाएगी। इससे प्राइवेसी बनी रहेगी। ऐसा नहीं है कंपनी इस तरह पहल पहली बार करने जा रही है। इससे पहले भी चैटजीपीटी पहले भी संवेदनशील बातचीत के दौरान हेल्पलाइन की सलाह देता रहा है। कई बार सिस्टम यूजर्स को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से बात करने के लिए भी कहता है। जरूरत पड़ने पर चैटजीपीटी बातचीत से थोड़ा ब्रेक लेने की सलाह भी देता है।
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एआई अब सिर्फ एक चैटबॉट नहीं रहा
जानकारों की मानें तो लोग अब इससे भावनात्मक बातचीत भी करने लगे हैं। कई यूजर्स अपनी निजी परेशानियां और मानसिक तनाव चैटजीपीटी से शेयर कर रहा है। ऐसे में एआई प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। लेकिन इसके इतर फीचर को लेकर चिंताए भी सामने आ रही है। उनका कहना है कि एआई हर बात को सही तरीके से समझ पाएगा कि नहीं। यह बड़ा सवाल है। कई बार सामान्य भावनात्मक बातचीत को भी सिस्टम गंभीर मान सकता है। इसलिए इस फीचर की कार्यप्रणाली पर नजर रहेगी।
इससे प्रतीत होता है कि एआई कंपनियां अब तकनीक के साथ-साथ यूजर्स की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है और इसपर ध्यान दे रहे हैं। ताकि यह प्लेटफॉर्म सुरक्षित और जिम्मेदार बन सके।
