AI Data Centers Elect Cost: Artificial Intelligence के तेज़ी से विस्तार के साथ दुनिया भर में डेटा सेंटरों की संख्या बढ़ रही है। जिसके कारण बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ती जा रही है। इसी चिंता को देखते हुए अमेरिका में टेक कंपनियों और सरकार के बीच एक नई पहल शुरू हुई है। जिसका मकसद आम उपभोक्ताओं को बढ़ते बिजली बिल से बचाना है। White House द्वारा घोषित इस पहल में कई बड़ी टेक कंपनियों ने भागीदारी की है। तो आइए जानते है इसके पीछे की रणनीति विस्तार से।
दिग्गज टेक कंपनियां आईं एक मंच पर
इस पहल में Amazon, Google, Meta, Microsoft, OpenAI, Oracle और xAI जैसी प्रमुख कंपनियों ने सहमति जताई है। इन कंपनियों का कहना है कि AI और क्लाउड सेवाओं के विस्तार के बावजूद वे कोशिश करेंगी कि इसका आर्थिक बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर न पड़े। जो यह दर्शाता है कि कंपनियां अब पब्लिक हितों का भी ख्याल ऱखना चाहती है।
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ऊर्जा व्यवस्था खुद विकसित करेंगी कंपनियां
इस समझौते के तहत टेक कंपनियां अपने नए डेटा सेंटरों के लिए जरूरी अतिरिक्त बिजली का इंतजाम खुद करेंगी। इसका मतलब यह है कि वे नई बिजली उत्पादन क्षमता तैयार करेंगी या फिर अतिरिक्त ऊर्जा खरीदकर अपनी जरूरत पूरी करेंगी। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि संसाधनों की लागत भी कंपनियां खुद वहन करेंगी ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर इसका असर न पड़े।
बिजली अपग्रेड पर खर्च करेगी कंपनियां
Data Centers के संचालन के लिए अक्सर बिजली ट्रांसमिशन और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना पड़ता है। अगर इसे अपग्रेड की जरूरत पड़ती है तो उसका खर्च भी टेक कंपनियां ही उठाएंगी। इसके अलावा वे बिजली के लिए अलग टैरिफ प्रणाली के तहत भुगतान करेंगी। जिसमें बिजली उपयोग न करने की स्थिति में भी शुल्क देना होगा।
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समझौते की मजबूती पर उठ रहे सवाल
लेकिन सवाल यह उठने लगा है कि यह घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। ऐसे में नियमों का पालन न करने पर कंपनियों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई होगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह पहल अभी पूरी तरह मजबूत नहीं है।
भविष्य में AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इन सभी पहलुओं पर व्यापक नीतियां बनाना भी जरूरी होगा। ताकि बदले हुए परिस्थितियों के बीच अचनाक से आम लोगों पर बोझ न पड़े।
