ईरान हमलों के बाद सैन्य AI पर टेक कंपनियों का हंगामा

ईरान हमलों के बाद सैन्य AI पर टेक कंपनियों का हंगामा

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March 5, 2026

Military AI Controversy: AI आज दुनिया की सबसे ताकतवर तकनीकों में से एक है, लेकिन अब इसी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है। कई AI कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी कंपनियों से मांग की है कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रमों में सीमित किया जाए और इसके लिए साफ नियम बनाए जाएं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google और OpenAI जैसी कंपनियों के सैकड़ों कर्मचारियों ने ओपन लेटर पर साइन किए हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि कंपनियों को रक्षा एजेंसियों के साथ काम करने से पहले यह तय करना चाहिए कि उनकी AI तकनीक का इस्तेमाल किन कामों के लिए किया जा सकता है और किन कामों के लिए नहीं। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और Pentagon के साथ AI साझेदारी पर बढ़ती चर्चा के बाद यह विवाद और ज्यादा तेज हो गया है।

Google और OpenAI समेत कई बड़ी AI कंपनियों के कर्मचारियों ने सैन्य कार्यक्रमों में AI के इस्तेमाल का विरोध किया है। ओपन लेटर के जरिए कर्मचारियों ने सरकार और कंपनियों से AI के उपयोग पर सख्त नैतिक नियम बनाने की मांग की है।

युद्ध और निगरानी में AI के इस्तेमाल पर चिंता

कर्मचारियों का कहना है कि आज के AI सिस्टम बहुत शक्तिशाली हो चुके हैं। ऐसे में अगर इनका इस्तेमाल युद्ध, बड़े पैमाने की निगरानी या पूरी तरह स्वचालित हथियारों में किया जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनका मानना है कि जो कंपनियां एडवांस AI बना रही हैं उन्हें अपनी तकनीक के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नैतिक सीमाएं तय करनी चाहिए। इस पूरे विवाद में एक बड़ा सवाल यह भी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत और टेक कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

We Will Not Be Divided पत्र को मिला समर्थन

इस मुद्दे पर We Will Not Be Divided नाम का एक ओपन लेटर तेजी से चर्चा में आया है। शुरुआत में इस पत्र पर कुछ 100 कर्मचारियों ने साइन किए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में यह संख्या बढ़कर करीब 900 तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि इन हस्ताक्षरकर्ताओं में लगभग 800 कर्मचारी के Google के हैं, जबकि करीब 100 कर्मचारी Open AI से जुड़े हैं।

लैटर में अमेरिकी रक्षा विभाग पर आरोप लगाया गया है कि वह अलग-अलग कंपनियों पर दबाव डालकर उन्हें सैन्य AI परियोजनाओं में शामिल करना चाहता है। कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह कंपनियों को अलग-अलग तरीके से मनाने की कोशिश उद्योग की सामूहिक आवाज को कमजोर कर सकती है।

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एंथ्रोपिक को लेकर पेंटागन के फैसले से बढ़ा विवाद

विवाद उस समय और गहरा हो गया जब Pentagon ने AI कंपनी Anthropic को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद कंपनी के AI मॉडल का अमेरिकी सरकारी सिस्टम में इस्तेमाल लगभग रुक गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Anthropic ने अपनी तकनीक को बड़े पैमाने पर निगरानी या पूरी तरह स्वचालित हथियारों में इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद Salesforce, Databricks and IBM जैसी कंपनियों के कर्मचारियों ने एक और ओपन लेटर जारी किया, जिसमें Pentagon से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की गई।

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Google की सैन्य साझेदारी फिर चर्चा में

इस पूरे मामले में Google भी फिर से चर्चा में आ गया है। खबरों के अनुसार, कंपनी Pentagon के साथ अपने Gemini AI मॉडल को सरकारी सिस्टम में इस्तेमाल करने पर बातचीत कर रही है। इस खबर ने 2018 के ‘प्रोजेक्ट मेवन’ विवाद की याद दिला दी, जब Google को कर्मचारियों के विरोध के बाद सैन्य ड्रोन विश्लेषण प्रोजेक्ट से पीछे हटना पड़ा था। बताया जा रहा है कि Google के AI विभाग के 100 से ज्यादा कर्मचारियों ने एक अलग पत्र लिखकर कंपनी से मांग की है कि वह Anthropic की तरह स्पष्ट नियम बनाए और उन परियोजनाओं से दूर रहे जिनका संबंध बड़े पैमाने की निगरानी या स्वचालित हथियारों से हो।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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