AI बन रहा ब्लॉकचेन और क्रिप्टो के लिए नया खतरा

AI बन रहा ब्लॉकचेन और क्रिप्टो के लिए नया खतरा

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December 17, 2025

Anthropic AI: AI अब सिर्फ चैटिंग, तस्वीर बनाने या रोजमर्रा के कामों तक सीमित नहीं है। अब यह वित्तीय दुनिया में भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। एक नई स्टडी में पता चला है कि एडवांस AI एजेंट अब ब्लॉकचेन के स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स में मौजूद कमजोरियों को पहचानकर उनका फायदा उठा सकते हैं। ये कमजोरियां क्रिप्टो और DeFi सिस्टम की नींव मानी जाती हैं इसलिए इन्हें आसानी से एक्सप्लॉइट किया जाना करोड़ों का नुकसान कर सकता है।

Anthropic के शोधकर्ताओं ने MATS और Anthropic Fellows के साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण रिसर्च की। इस रिसर्च में 3 एडवांस AI मॉडल Claude Opus 4.5, Claude Sonnet 4.5 और GPT-5 को एक खास टेस्ट पर लगाया गया है। इस टेस्ट का नाम SCONE-bench है, जिसमें 2020 से 2025 के बीच एक्सप्लॉइट हुए 405 वास्तविक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल थे। उद्देश्य यह जानना था कि AI कितना गहराई से और कितनी समझदारी से इन कमजोरियों का फायदा उठा सकता है।

AI अब ब्लॉकचेन स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की कमजोरियों का फायदा उठाने लगा है। हालिया रिसर्च में बड़े AI मॉडल्स ने करोड़ों डॉलर की संभावित फाइनेंशियल रिस्क दिखाईं।

AI ने करोड़ों का नुकसान ‘सिम्युलेट’ करके दिखाया

जब शोधकर्ताओं ने इन AI मॉडलों को मार्च के बाद बनाए गए कॉन्ट्रैक्ट्स पर टेस्ट किया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। AI ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स में कमजोरियां पकड़ लीं और उन पर आधारित सिम्युलेशन में 4.6 मिलियन डॉलर तक की राशि हासिल कर ली। AI न सिर्फ कमजोरी ढूंढ सकता है बल्कि आर्थिक नुकसान भी कर सकता है।

इसके अलावा Sonnet 4.5 और GPT-5 ने 2,849 नए कॉन्ट्रैक्ट्स भी स्कैन किए हैं। ये वे कॉन्ट्रैक्ट थे जिनमें पहले किसी कमजोरी का पता नहीं चला था। फिर भी AI ने इनमें से दो नई कमजोरियां खोज निकालीं। GPT-5 ने इन कमजोरियों का उपयोग करके 3,694 डॉलर की रकम हासिल की, जबकि इसे यह काम करने में 3,476 डॉलर का खर्च आया। इससे साबित होता है कि AI स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को हैक करना संभव और किफायती दोनों है।

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AI मॉडलों का प्रदर्शन और बड़ी जोखिम की चेतावनी

SCONE-bench का खास पहलू यह है कि यह सिर्फ कमजोरी नहीं दिखाता, बल्कि बताता है कि एक्सप्लॉइट से होने वाला वित्तीय नुकसान कितना है। 10 एडवांस AI मॉडलों ने 405 में से 207 कॉन्ट्रैक्ट्स को सफलतापूर्वक एक्सप्लॉइट किया है। इससे संभावित नुकसान करीब 550.1 मिलियन डॉलर बैठा। मार्च के बाद आए 34 कॉन्ट्रैक्ट्स में से 19 को Opus 4.5, Sonnet 4.5 और GPT-5 ने एक्सप्लॉइट किया है। सिर्फ Opus 4.5 की खोज से 4.5 मिलियन डॉलर का सिम्युलेटेड नुकसान हुआ है।

एक टेस्ट में AI ने एक ऐसे टोकन की कमजोरी पकड़ी, जिसमें एक पब्लिक फंक्शन को बार-बार चलाकर बैलेंस बढ़ाया जा सकता था। इस AI एक्सप्लॉइट से लगभग 2,500 डॉलर की सिम्युलेटेड कमाई हुई। GPT-5 ने हर कॉन्ट्रैक्ट स्कैन पर औसतन 1.22 डॉलर खर्च किया, जबकि प्रति एक्सप्लॉइट इसकी औसत आय 1,847 डॉलर रही।

AI की क्षमता तेजी से बढ़ रही है

शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले साल AI की स्मार्ट-कॉन्ट्रैक्ट हैकिंग क्षमता हर 1.3 महीने में दोगुनी हो रही थी। AI की समझ, टूल्स और लॉन्ग-टर्म प्लानिंग के कारण यह विकास और तेज हो रहा है। इसका मतलब है कि डेवलपर्स के पास कमजोरियां ठीक करने का समय बहुत कम होता जा रहा है। फिलहाल, AI सबसे पहले ओपन-सोर्स कोड की जांच कर रहा है, लेकिन आगे चलकर यह प्राइवेट सॉफ्टवेयर तक भी पहुंच सकता है। हालांकि, AI सुरक्षा में भी मदद कर सकता है, लेकिन खतरा फिलहाल उससे बड़ा है जो इसके गलत उपयोग से पैदा हो सकता है।

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ब्लॉकचेन दुनिया पर इसका बड़ा असर

Ethereum के डेवलपर्स का कहना है कि पुराने स्टैंडर्ड और नए प्रस्ताव जैसे HTTP 402 और EIP-3009 AI एजेंट्स को ऑटोमैटिक पेमेंट्स जैसी सुविधाएं देने की क्षमता रखते हैं। भविष्य में AI एजेंट Ethereum का उपयोग मनुष्यों से भी ज्यादा कर सकते हैं। दूसरी ओर Binance के को-फाउंडर CZ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि कई AI-आधारित क्रिप्टो प्रोजेक्ट सिर्फ टोकन बेचने पर ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि दिसंबर 2023 से AI-क्रिप्टो सेक्टर 61% टूट चुका है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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