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AI Tutor और Virtual Classroom से बदलेगी पढ़ाई की दुनिया

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September 25, 2026

AI Tutors EdTech : क्या डिजिटल लर्निंग अब सिर्फ पढ़ाई का तरीका नहीं, बल्कि कारोबार और सरकारी सेवाओं की जरूरत बन चुकी है? यूरेशिया और CIS क्षेत्र में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां अब ऐसे प्लेटफॉर्म चाहती हैं, जो कम समय में कर्मचारियों की स्किल बढ़ाएं और नतीजे भी माप सकें। डिजिटल लर्निंग की मांग खासतौर पर स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और तकनीकी प्रशिक्षण में बढ़ी है। इसका कारण बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी, AI का बढ़ता इस्तेमाल और डिजिटल टूल खरीदने वाली कंपनियों की बदलती जरूरतें हैं।

AI और बेहतर इंटरनेट के साथ डिजिटल लर्निंग तेजी से बदल रही, जानें EdTech कंपनियों के लिए यूरेशिया में नए मौके।

डिजिटल लर्निंग के लिए इंटरनेट बना मजबूत आधार

CIS और आसपास के देशों में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी वजह बेहतर कनेक्टिविटी है। World Bank के मुताबिक, लो और मिडिल इनकम देशों में यूरोप और सेंट्रल एशिया में इंटरनेट पहुंच 84% है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनियों का डिजिटल टूल खरीदने का तरीका भी बदला है। अब सिर्फ सॉफ्टवेयर के फीचर्स नहीं देखे जाते। सुरक्षा, दूसरे सिस्टम से जुड़ने की क्षमता और विक्रेता की जवाबदेही भी अहम हो गई है। इसी बीच Generative AI पर खर्च भी बढ़ रहा है। IDC के अनुमान के मुताबिक, 2020 के दशक के मध्य में सॉफ्टवेयर और सेवाओं में GenAI खर्च तेजी से बढ़ेगा। शिक्षा क्षेत्र में भी इसका असर दिख रहा है। AI की तकनीक अब सिर्फ प्रयोग तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल ट्यूटरिंग, परीक्षा, कंटेंट तैयार करने और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने में किया जा रहा है।

Virtual Classroom में अब सिर्फ स्केल काफी नहीं

ऑनलाइन क्लास, Learning Management System और दूर से परीक्षा कराने वाले प्लेटफॉर्म अब नए नहीं हैं। असली सवाल अब पढ़ाने की गुणवत्ता और उसके नतीजों को लेकर है। कंपनियां जानना चाहती हैं कि अलग-अलग जगहों पर एक जैसी ट्रेनिंग कैसे दी जाए। स्किल को एक समान तरीके से प्रमाणित कैसे किया जाए और बिना ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती किए सीखने का असर कैसे मापा जाए।

इस दिशा में सफल डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म तीन अहम कामों पर ध्यान दे रहे हैं:

  • कंटेंट को छोटे मॉड्यूल में तैयार करना, ताकि उसे जल्दी अपडेट और स्थानीय भाषा में बदला जा सके।
  • पहचान और एक्सेस सिस्टम को जोड़ना, ताकि छात्र, शिक्षक और पार्टनर एक ही व्यवस्था में रहें।
  • Learning Analytics का इस्तेमाल करना, जिससे पढ़ाई की प्रगति को कामकाज के नतीजों से जोड़ा जा सके।

इसका इस्तेमाल स्कूलों के अलावा कॉरपोरेट ट्रेनिंग, व्यावसायिक अकादमियों और फैक्ट्री कर्मचारियों की तकनीकी ट्रेनिंग में भी हो रहा है।

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AI Tutor से बढ़ी उम्मीद, लेकिन निगरानी भी जरूरी

AI Tutor को अक्सर व्यक्तिगत पढ़ाई से जोड़ा जाता है, लेकिन यूरेशिया में कंपनियां इसे ज्यादा व्यावहारिक वजहों से अपना रही हैं। इनमें कमजोर छात्रों को जल्दी मदद देना, कोर्स पूरा करने की दर बढ़ाना और अलग-अलग क्षेत्रों में परीक्षा के नतीजों को ज्यादा एक जैसा बनाना शामिल है। UNESCO की Generative AI और शिक्षा से जुड़ी गाइडलाइन में पारदर्शिता, मानव निगरानी, समानता और डेटा सुरक्षा पर जोर दिया गया है। UNESCO के AI शिक्षकों के लिए AI क्षमता ढांचा में भी शिक्षकों के लिए AI से जुड़ी जानकारी और नैतिक समझ की जरूरत बताई गई है। खरीद प्रक्रिया में भी बदलाव दिख रहा है। कंपनियां अब AI आधारित शिक्षा टूल के साथ ट्रेनिंग, नीतियों और विक्रेता की जांच को भी जरूरी मान रही हैं।

RAND की अमेरिकी स्कूल जिलों पर की गई रिसर्च के अनुसार, एक साल में AI ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षकों का हिस्सा 23% से बढ़कर 48% हुआ। यह आंकड़ा अमेरिका का है, लेकिन इससे संस्थानों में AI ट्रेनिंग की बढ़ती जरूरत का संकेत मिलता है।

EdTech कंपनियों को बाजार का मौका

इसी बदलते बाजार में ExpoCifra की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यह ExpoElectronica इकोसिस्टम का हिस्सा है, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन से जुड़े खरीदार पहुंचते हैं। ExpoElectronica खुद को रूस और यूरेशिया Economic Union में सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स प्रदर्शनी के तौर पर पेश करता है। ExpoCifra के 2025 के आंकड़ों में 5,470+ यूनिक विजिटर और 100+ प्रदर्शकों का दावा किया गया है। यहां आने वाले खरीदार सिर्फ शिक्षा क्षेत्र से नहीं होते। यही संगठन Cloud, Cybersecurity, Data Platform और Industrial Digitalisation जैसी तकनीकों में भी निवेश करते हैं।

इस वजह से EdTech कंपनियों को एक ही जगह सरकारी संस्थानों, बड़े कारोबार, स्टार्टअप और सिस्टम इंटीग्रेटर्स से बातचीत का मौका मिल सकता है। CIO, CTO और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अधिकारियों के साथ संपर्क आगे चलकर पार्टनरशिप, पायलट प्रोजेक्ट और खरीद प्रक्रिया में बदल सकता है।

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2026 में डिजिटल लर्निंग का फोकस नतीजों पर

अभी डिजिटल लर्निंग का बाजार केवल ऑनलाइन कंटेंट बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनियां ऐसे समाधान चाहती हैं, जो स्थानीय जरूरतों के मुताबिक हों, डेटा नियमों का पालन करें और कुछ महीनों में मापने योग्य परिणाम दें। ExpoCifra 2026 जैसे प्लेटफॉर्म EdTech, AI Tutor और Enterprise Learning Infrastructure तैयार करने वाली कंपनियों के लिए CIS और व्यापक Eurasia क्षेत्र में बाजार तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकते हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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