Demis Hassabis AGI: क्या दुनिया जल्द ऐसी AI देखेगी जो इंसानों की तरह लगभग हर बौद्धिक काम कर सके? AGI (Artificial General Intelligence) को लेकर Google DeepMind के CEO डेमिस हैसाबिस ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया AGI से अब सिर्फ कुछ साल दूर है। उनका मानना है कि अगर इसे जिम्मेदारी से विकसित किया गया, तो यह बिजली और आग जैसी सबसे बड़ी तकनीकी खोजों में शामिल होगी।
क्या इंसानों जैसी सोचने वाली AI जल्द आने वाली है? DeepMind CEO ने AGI को लेकर बड़ा बयान दिया है।
AGI को बताया सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति
डेमिस हैसाबिस ने अपने LinkedIn लेख में लिखा कि उन्होंने पूरी जिंदगी AGI पर इसलिए काम किया क्योंकि यह मानव इतिहास की सबसे उपयोगी तकनीकों में से एक बन सकती है। उनके मुताबिक, AGI की तुलना इंटरनेट या स्मार्टफोन से नहीं, बल्कि बिजली और आग की खोज से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज AI हेल्थकेयर, शिक्षा और कारोबार में मदद कर रही है, लेकिन AGI आने के बाद कई उद्योगों और अर्थव्यवस्थाओं में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
AI के लिए पहले नियम बनाने की जरूरत
हैसाबिस का कहना है कि AI तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि सरकारें और नियामक संस्थाएं पीछे रह गई हैं। उनका मानना है कि AGI आम लोगों तक पहुंचने से पहले मजबूत सुरक्षा नियम तैयार होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एक स्वतंत्र वैश्विक संस्था बनाई जाए, जो सबसे शक्तिशाली AI मॉडल को लॉन्च से पहले जांचे। यह संस्था साइबर सुरक्षा, जैविक अनुसंधान और संभावित दुरुपयोग जैसे जोखिमों का मूल्यांकन करेगी। इसमें सरकार, वैज्ञानिक और AI कंपनियां मिलकर साझा सुरक्षा मानक तय कर सकते हैं।
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भारत पर क्या होगा असर?
भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। स्टार्टअप, निजी कंपनियां और सरकारी योजनाएं AI तकनीक पर लगातार काम कर रही हैं। ऐसे में अगर वैश्विक सुरक्षा मानक लागू होते हैं, तो भारतीय कंपनियों को भी अपने उन्नत AI मॉडल के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच और पारदर्शिता अपनानी पड़ सकती है।
संभावित बदलावों में शामिल हैं:
- AI के लिए सख्त नियम और बेहतर निगरानी
- दूसरे देशों के साथ नियामकीय सहयोग
- सरकारी AI सेवाओं पर लोगों का बढ़ता भरोसा
- जिम्मेदार AI रिसर्च को अधिक बढ़ावा
हालांकि, रोजमर्रा के AI टूल इस्तेमाल करने वाले आम यूजर्स पर इसका तुरंत बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
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AGI अभी वास्तविकता नहीं बनी है, लेकिन इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI के विकास के साथ सुरक्षा नियम बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। आज लिए गए फैसले ही तय करेंगे कि भविष्य में इंसान और AI का रिश्ता कितना सुरक्षित और भरोसेमंद होगा।
