AI ने डिजाइन किए 16 वायरस, E. coli पर दिखा असर

AI ने डिजाइन किए 16 वायरस, E. coli पर दिखा असर

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August 7, 2026

Stanford University: क्या AI अब ऐसे वायरस डिजाइन कर सकता है जो खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म कर सकें? Stanford के शोधकर्ताओं ने generative AI मॉडल की मदद से 16 ऐसे बैक्टीरियोफेज तैयार किए, जो लैब टेस्ट में E. coli बैक्टीरिया को मारने में सफल रहे। वैज्ञानिकों ने करीब 300 AI-designed phages बनाए और उनकी जांच की। इन वायरस का मकसद इंसानों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। वैज्ञानिक इन्हें भविष्य में मुश्किल बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज के संभावित विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

Stanford की नई रिसर्च में AI से बनाए गए 16 वायरस ने E. coli को खत्म किया, जानिए कैसे यह तकनीक बढ़ते एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से लड़ने की नई राह दिखा रही है।

AI ने कैसे डिजाइन किए ये वायरस?

इस रिसर्च में Stanford के वैज्ञानिकों ने Evo 2 नाम के AI मॉडल का इस्तेमाल किया। इसे Stanford के केमिकल इंजीनियर Brian Hie और उनकी टीम ने विकसित किया है। शोधकर्ताओं ने bacteriophage ΦX174 को शुरुआती आधार बनाया। इसका जीनोम 6,000 से कम base pairs का है। तुलना के लिए इंसानी जीनोम में करीब 3 अरब base pairs होते हैं। Evo 2 को पूरे Phage Genome के नए DNA Sequence तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने AI से मिले डिजाइनों को लैब में बनाया और टेस्ट किया। करीब 300 तैयार किए गए फगेस में से 16 ऐसे मिले, जिन्होंने E. coli को मारने की क्षमता दिखाई। कुछ AI-designed phages ने लैब टेस्ट में मूल PhiX174 से भी बेहतर प्रदर्शन किया।

16 वायरस का मिश्रण क्यों अहम है?

इस रिसर्च के पीछे सबसे बड़ी वजह Antibiotic Resistance है। बैक्टीरिया बार-बार एंटीबायोटिक के संपर्क में आने के बाद उनके खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अलग-अलग फेगस का मिश्रण इस समस्या से निपटने में मदद कर सकता है। अगर बैक्टीरिया एक phage के खिलाफ प्रतिरोधी बन जाए, तो दूसरे अलग phage उन्हें निशाना बना सकते हैं।

टीम ने 16 phages के Cocktail को ऐसे E. coli पर भी टेस्ट किया, जो प्राकृतिक ΦX174 phage के खिलाफ प्रतिरोधी हो चुका था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस मिश्रण ने ऐसे E. coli के खिलाफ तेजी से असर दिखाया।

क्या इससे भविष्य में नए इलाज मिल सकते हैं?

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऐसी तकनीक आगे चलकर tuberculosis, MRSA और Pseudomonas aeruginosa जैसे मुश्किल बैक्टीरियल संक्रमणों पर शोध में मदद कर सकती है। हालांकि, AI से डिजाइन किए गए phage को मरीजों के इलाज तक पहुंचने में अभी लंबा समय लगेगा। DNA डिजाइन करने, उसे तैयार करने और लैब में जांच करने की प्रक्रिया महंगी और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। इस रिसर्च में ग्रेजुएट छात्र सैमुअल किंग ने एक स्क्रीनिंग फ्रेमवर्क भी तैयार किया। इससे हजारों AI-generated genomes में से लैब टेस्ट के लिए ज्यादा संभावनाओं वाले विकल्प चुनने में मदद मिली।

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AI के साथ Biosecurity की चुनौती भी

Evo 2 को Open-Source Tool के रूप में जारी किया गया है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने इसके संभावित Biosecurity जोखिमों पर भी सवाल उठाए हैं। Brian Hie ने माना कि इस तरह के AI tools के बदले हुए संस्करणों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि, उनका मानना है कि AI का इस्तेमाल खतरनाक प्राकृतिक pathogens को बेहतर समझने और सुरक्षा उपाय विकसित करने के लिए भी किया जा सकता है। अब टीम इससे लंबे और ज्यादा जटिल DNA sequences पर काम कर रही है। वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि AI से ज्यादा genetic novelty और ज्यादा controllable outcomes कैसे हासिल किए जा सकते हैं।

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यह रिसर्च दिखाती है कि AI अब सिर्फ कंप्यूटर कोड या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल नए biological designs तलाशने में भी कर रहे हैं। हालांकि, किसी AI-designed phage को इंसानी इलाज में इस्तेमाल करने से पहले सुरक्षा और प्रभावशीलता की लंबी जांच जरूरी होगी।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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