Digital payments India : भारत में UPI पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू करने को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। अभी UPI पेमेंट पर ग्राहक और ज्यादातर मर्चेंट से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन बढ़ते लेनदेन और पेमेंट सिस्टम की लागत के बीच बड़े मर्चेंट के लिए सीमित MDR की चर्चा चल रही है। UPI ने कुछ ही साल में देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। अगस्त 2026 में 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू 29.82 लाख करोड़ रुपये रही।
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच MDR लागू करने की तैयारी पर चर्चा, जानें 2,000 रुपये की सीमा, संभावित शुल्क और मर्चेंट्स की चिंता।
UPI की शुरुआत से अब तक कितना बढ़ा इस्तेमाल?
NPCI ने UPI की शुरुआत 2016 में की थी। पहले महीने सिर्फ 90,000 ट्रांजैक्शन हुए थे। इनकी कुल वैल्यू करीब 38 लाख रुपये थी। इसके बाद UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। FY26 में UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 241.62 अरब तक पहुंच गया। इनकी कुल वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। रिपोर्ट के मुताबिक, UPI अब भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा है। UPI के फ्री मॉडल ने इसकी पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। 2020 से पहले P2M यानी Person-to-Merchant ट्रांजैक्शन पर 0.3% तक MDR लगता था। जनवरी 2020 से इसे हटा दिया गया।
MDR लागू करने की चर्चा क्यों तेज हुई?
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत करने की जरूरत भी बढ़ी है। बैंक, पेमेंट कंपनियां और दूसरे सिस्टम ऑपरेटर इस पूरे नेटवर्क को चलाने और अपग्रेड करने में खर्च करते हैं। इसी वजह से पेमेंट इंडस्ट्री का एक हिस्सा सीमित MDR की मांग करता रहा है। तर्क है कि इससे एक स्थायी कमाई का जरिया बनेगा। इस रकम का इस्तेमाल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को मजबूत करने में किया जा सकता है। हालांकि, सरकार की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि ग्राहक से UPI ट्रांजैक्शन का शुल्क लेने का लक्ष्य नहीं है। अगस्त में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि अगर MDR लागू होता है तो यह सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर, तय सीमा के ऊपर और मामूली दर पर हो सकता है।
क्या 2 हजार रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर लगेगा MDR?
संभावित मॉडल में 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने की चर्चा है। इसमें शुल्क ग्राहक के बजाय मर्चेंट से लिया जा सकता है, लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल भी है। अगर मर्चेंट पर लागत बढ़ती है तो क्या वह इसे ग्राहक से वसूल करेगा? LocalCircles के ताजा सर्वे में 32,000 से ज्यादा कारोबारियों और मर्चेंट्स से राय ली गई।
सर्वे में सिर्फ 17% मर्चेंट्स ने कहा कि वे 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.3% या उससे ज्यादा MDR देने को तैयार हैं। वहीं 41% ने किसी भी MDR को स्वीकार नहीं करने की बात कही। 9% कारोबारियों ने कहा कि वे UPI पेमेंट लेते ही नहीं हैं। यानी MDR की दर तय करना आसान नहीं होगा। ज्यादा शुल्क से छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।
UPI की हिस्सेदारी कितनी बड़ी हो चुकी है?
UPI अब भारत के रिटेल डिजिटल पेमेंट सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा है। Grant Thornton Bharat के मुताबिक FY26 में UPI पर 241.62 अरब ट्रांजैक्शन हुए। इनकी वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। UPI की पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सिंगापुर, UAE, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस, कतर और कंबोडिया जैसे देशों में भी UPI आधारित मर्चेंट पेमेंट स्वीकार किए जाते हैं। यही वजह है कि MDR का फैसला सिर्फ फीस का मुद्दा नहीं है। इसका असर छोटे दुकानदारों, बड़े कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट की आदत पर भी पड़ सकता है।
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MDR से बढ़ सकती है पेमेंट की लागत
MDR के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत है। दूसरी तरफ छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की चिंता है। LocalCircles के एक अलग सर्वे में 45,000 से ज्यादा UPI यूजर्स से राय ली गई। इसमें 53% यूजर्स ने कहा कि अगर मर्चेंट शुल्क उनसे वसूलते हैं तो वे ज्यादा रकम वाले पेमेंट के लिए UPI से दूसरे विकल्पों की तरफ जा सकते हैं। इनमें 27% क्रेडिट कार्ड, 14% डेबिट कार्ड और 12% कैश या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल करने की बात कही गई।इससे साफ है कि MDR का असर सिर्फ मर्चेंट तक सीमित नहीं रह सकता। अगर शुल्क ग्राहक तक पहुंचा तो UPI की जगह दूसरे पेमेंट विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
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छोटे कारोबारियों को राहत देने की चुनौती
MDR लागू करने का तरीका सबसे अहम होगा। एक विकल्प यह है कि सभी मर्चेंट पर एक जैसी दर लगाने के बजाय कारोबार के आकार और कैटेगरी के हिसाब से शुल्क तय किया जाए। इससे छोटे दुकानदारों और माइक्रो बिजनेस पर बोझ कम रखा जा सकता है। बड़े मर्चेंट से सीमित शुल्क लिया जा सकता है। अभी MDR की अंतिम दर और लागू होने की सीमा तय नहीं हुई है इसलिए आने वाले नियमों पर सबकी नजर है।
UPI की मौजूदा पहुंच देखते हुए सरकार के सामने चुनौती दोहरी है पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत करना और इसकी सबसे बड़ी खासियत यानी आसान और कम लागत वाली पेमेंट को बनाए रखना। फिलहाल ताजा तस्वीर यही है कि UPI MDR पर बहस तेज है, लेकिन अंतिम मॉडल सामने आना बाकी है। 24.51 अरब मासिक ट्रांजैक्शन वाले इस पेमेंट सिस्टम में छोटा बदलाव भी करोड़ों यूजर्स और कारोबारियों पर असर डाल सकता है।
