AI से 18 महीने में कार बनाएगा चीन, सुरक्षा जांच सख्त

AI से 18 महीने में कार बनाएगा चीन, सुरक्षा जांच सख्त

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September 1, 2026

China AI Car Development : चीनी ऑटो कंपनियां कारों को रिकॉर्ड तेजी से बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। AI की मदद से नई कार को बाजार तक लाने का समय करीब 18 महीने तक आ सकता है। अभी चीन में यह समय करीब 2 साल है, लेकिन इसी तेजी ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। चीन के नियामक अब कंपनियों की जांच सख्त कर रहे हैं। अचानक निरीक्षण हो रहे हैं और नई ऊर्जा वाली कारों की सड़क पर टेस्टिंग बढ़ाने की तैयारी है।

AI से चीनी कंपनियां नई कारें जल्दी लॉन्च करेंगी, अब चीन नई ऊर्जा वाली कारों की सड़क टेस्टिंग 30,000 किलोमीटर तक बढ़ाने पर विचार कर रही।

चीनी ऑटो कंपनियों पर बढ़ी सुरक्षा की निगरानी

चीन की ऑटो इंडस्ट्री में तेजी से नए मॉडल और फीचर्स जोड़े जा रहे हैं। इससे कंपनियों के बीच मुकाबला भी तेज हुआ है, लेकिन नियामक को डर है कि ज्यादा तेजी से काम करने पर गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। चीन के ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक, कंपनियां सुरक्षा नियमों को पूरा करते हुए विकास का समय लगातार घटा रही हैं। कुछ अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा दबाव में ग्राहक ही कार की असली टिकाऊपन और सुरक्षा को जांचने वाला बन सकता है।

Chery के उपाध्यक्ष Li Xueyong ने 26 अगस्त की सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कार कोई तेजी से बिकने वाला सामान्य सामान नहीं है। कार लाखों परिवारों की सुरक्षा से जुड़ी होती है और उसे अलग-अलग सड़कों, मौसम और ड्राइविंग परिस्थितियों में टिकना चाहिए।

चीन में कारों की टेस्टिंग भी बढ़ाने की तैयारी

चीन अब नई ऊर्जा वाली कारों के लिए अनिवार्य सड़क परीक्षण को 30,000 किलोमीटर तक बढ़ाने का प्रस्ताव दे रहा है। मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले यह बड़ा बदलाव होगा। इसका मकसद छोटी विकास अवधि के कारण सुरक्षा मानकों पर पड़ने वाले असर को रोकना है। साथ ही, ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी प्राथमिकता है। हाल के समय में बैटरी, एडवांस ड्राइवर-असिस्टेंस तकनीक और दरवाजों से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। कई गंभीर और जानलेवा हादसों के बाद सरकार ने इन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया है। चीन अब तक का सबसे बड़ा वाहन रिकॉल भी कर रहा है। Tesla समेत 9 कंपनियों की 42.7 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारों को नए दरवाजे संबंधी नियमों के हिसाब से ठीक किया जाना है।

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जुलाई में मेमेकॉइन, अगस्त में बदला निवेशकों का रुझान

चीन की तेज कार इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसका असर डिजाइन से लेकर टेस्टिंग तक कई स्तरों पर दिख रहा है। AI की मदद से डिजिटल डिजाइन की जांच जल्दी की जा सकती है। इंजीनियरों को पहले हजारों कंपोनेंट्स को मैन्युअली जांचना पड़ता था। अब कई काम वर्चुअल मॉडल और सिमुलेशन से पहले ही पूरे किए जा सकते हैं।

इसी वजह से IAT Automobile Technology और China Association of Automobile Manufacturers के अनुमान के मुताबिक, नई कार को बाजार में लाने का समय 18 महीने तक आ सकता है, लेकिन हर काम को AI या सिमुलेशन से नहीं बदला जा सकता। Shanghai स्थित Automotive Foresight के मैनेजिंग डायरेक्टर Yale Zhang ने कहा कि AI डिजाइन की गलतियां कम कर सकता है, लेकिन 30,000 या 50,000 किलोमीटर की सड़क टेस्टिंग को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

कंपनियां रफ्तार कम करने को तैयार नहीं

सुरक्षा पर बढ़ती निगरानी के बावजूद चीनी कंपनियों के लिए रफ्तार कम करना आसान नहीं होगा। बाजार में बिक्री पर दबाव है। कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। कंपनियों का मुनाफा भी सीमित हो रहा है। ग्राहक भी लगातार नए मॉडल और नए फीचर्स चाहते हैं। Zhejiang Geely Holding Group के चेयरमैन Li Shufu ने 20 जून को सरकारी प्रसारक CCTV को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सभी कंपनियां आगे निकलने की दौड़ में हैं। उनके मुताबिक, किसी से धीमा होने को कहना आसान नहीं है। Automobility के Bill Russo के मुताबिक, चीन के ऑटो बाजार में तेज रफ्तार अब काम करने का तरीका बन चुकी है। कंपनियां सॉफ्टवेयर और डिजिटल फीचर्स में तेजी जारी रख सकती हैं, लेकिन सुरक्षा से जुड़े हार्डवेयर की जांच मजबूत होनी चाहिए।

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विदेशी कंपनियां भी चीन से सीख रही हैं

चीनी कंपनियों की तेज रफ्तार ने विदेशी कार निर्माताओं पर भी दबाव बढ़ाया है। Volkswagen ने चीन के Anhui प्रांत में ऐसा रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर बनाया है, जो जर्मनी के बाहर उसका पहला ऐसा केंद्र है जहां वाहन को पूरी तरह डिजाइन और टेस्ट किया जा सकता है। Volkswagen की ID.UNYX 08 इलेक्ट्रिक SUV को Xpeng के साथ मिलकर 24 महीने में विकसित किया गया। इसमें AI और वर्चुअल रियलिटी की मदद से डिजिटल टेस्टिंग की गई।

Renault ने भी चीन में अपनी Twingo E-Tech को 21 महीने में विकसित किया। Toyota अब आमतौर पर लगने वाले 3 से 5 साल के मॉडल बदलाव चक्र को छोटा करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, छोटी कंपनियों के लिए नई सुरक्षा जरूरतें महंगी पड़ सकती हैं। बड़ी कंपनियों के पास ज्यादा पैसा और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था है। ऐसे में उद्योग में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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