FMGE Exempt Countries: क्या विदेश से मेडिकल डिग्री लेने के बाद हर छात्र को FMGE देना जरूरी है? जवाब हर मामले में एक जैसा नहीं है। अमेरिका, UK, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से मेडिकल पढ़ाई करने वाले कुछ योग्य भारतीय छात्रों को मौजूदा नियमों और शर्तों के तहत FMGE से छूट मिल सकती है। हर साल NEET के बाद हजारों भारतीय छात्र विदेश में मेडिकल पढ़ाई का विकल्प चुनते हैं। भारत में सीमित मेडिकल सीट और कड़ी प्रतिस्पर्धा इसकी बड़ी वजह है। हालांकि, विदेश से डिग्री लेने के बाद भारत में प्रैक्टिस के लिए नियमों को समझना बेहद जरूरी है।
विदेश से मेडिकल पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए FMGE से जुड़ी अहम जानकारी, जानें अमेरिका, UK, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के नियम।
अमेरिका से मेडिकल पढ़ाई पर FMGE छूट
अमेरिका में मेडिकल शिक्षा भारत से काफी अलग है। यहां आमतौर पर पहले 4 साल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई होती है। इसके बाद करीब 4 साल का MD प्रोग्राम किया जाता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को क्लिनिकल ट्रेनिंग भी मिलती है। कुछ तय शर्तें पूरी करने वाले अमेरिकी मेडिकल योग्यता वाले छात्रों को भारत में FMGE से छूट मिल सकती है।
UK और कनाडा में मेडिकल एजुकेशन
UK में मेडिकल कोर्स आमतौर पर 5 से 6 साल का होता है। छात्रों को पढ़ाई के साथ अस्पतालों में क्लिनिकल अनुभव भी मिलता है। UK की मेडिकल डिग्री के आधार पर भी पात्र छात्रों के लिए FMGE से छूट का प्रावधान हो सकता है। कनाडा में मेडिकल पढ़ाई का रास्ता अमेरिका जैसा है। आमतौर पर पहले ग्रेजुएशन और फिर मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया के बाद MD प्रोग्राम में प्रवेश मिलता है। यहां भी क्लिनिकल ट्रेनिंग पर जोर रहता है।
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ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का क्या नियम?
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल कोर्स की अवधि आमतौर पर 5 से 6 साल होती है। न्यूजीलैंड में मेडिकल पढ़ाई करीब 6 साल की हो सकती है। दोनों देशों में अस्पतालों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग मिलती है। तय एलिजिबिलिटी पूरी करने वाले छात्रों को इन देशों की मेडिकल डिग्री के आधार पर FMGE से छूट मिल सकती है।
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एडमिशन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विदेश में मेडिकल पढ़ाई चुनने से पहले छात्र NMC के मौजूदा नियम, डिग्री की मान्यता, कोर्स की अवधि और फीस जरूर जांचें। FMGE से छूट हर छात्र को अपने आप नहीं मिलती। विदेशी मेडिकल डिग्री और छात्र की पात्रता के आधार पर नियम लागू होते हैं। इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक शर्तों की जांच करना जरूरी है। विदेश में मेडिकल पढ़ाई का विकल्प चुनने से पहले सिर्फ फीस और कॉलेज न देखें। भारत लौटने के बाद लाइसेंस और FMGE से जुड़े मौजूदा नियम भी जरूर समझें।
