China AI: चीन के शोधकर्ताओं ने इसी सवाल को परखने के लिए Light Society नाम का एक बड़ा AI सामाजिक सिमुलेशन तैयार किया है। इसमें एक अरब वर्चुअल एजेंट को विशाल सोशल नेटवर्क में रखा गया और उन्हें एक-दूसरे की राय प्रभावित करने दी गई। इस प्रोजेक्ट से जुड़े शोधकर्ताओं में University of Science and Technology of China, Tsinghua University, Fudan University और Zhongguancun Academy के शोधकर्ता शामिल हैं। इसका मकसद यह समझना है कि बहुत बड़ी आबादी में विचार और विश्वास किस तरह फैल सकते हैं।
1 अरब AI एजेंट को एक ही वर्चुअल समाज में रखा गया, Light Society प्रयोग में AI, फ्लैट अर्थ और मंगल जैसे मुद्दों पर राय का अध्ययन हुआ।
Light Society क्या है और 1 अरब AI एजेंट कैसे काम करते हैं?
Light Society एक ऐसा ढांचा है, जिसमें इंसानों जैसे सामाजिक व्यवहार का बड़े स्तर पर सिमुलेशन किया जाता है। हर वर्चुअल व्यक्ति के प्रोफाइल में उम्र, शिक्षा, आय, सामाजिक वर्ग और दूसरी जनसांख्यिकीय जानकारी शामिल हो सकती है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए World Values Survey के डेटा का इस्तेमाल किया। साफ किए गए डेटा में 96,125 वास्तविक सर्वे रिकॉर्ड थे। इन्हें प्राकृतिक भाषा वाले प्रोफाइल में बदला गया और फिर AI एजेंट तैयार किए गए। सिमुलेशन आगे बढ़ने के साथ एजेंटों की मान्यताएं, यादें, लक्ष्य, जगह और सामाजिक संपर्क भी ट्रैक किए जाते हैं। यानी हर एजेंट सिर्फ एक स्थिर प्रोफाइल नहीं है।
1 अरब AI एजेंट का मतलब 1 अरब ChatGPT नहीं
इतने बड़े प्रयोग में हर एजेंट के लिए अलग बड़ा भाषा मॉडल चलाना बेहद महंगा होता। इसलिए शोधकर्ताओं ने एक बड़े AI मॉडल के व्यवहार की नकल करने वाले छोटे मॉडल तैयार किए। एक अरब एजेंट वाले राय प्रयोग में Gemini 2.0 Flash को शिक्षक मॉडल की तरह इस्तेमाल किया गया। करीब 4 लाख नमूना बातचीत तैयार की गईं। इनसे छोटे मॉडल को प्रशिक्षित किया गया। अंतिम सिमुलेशन में हल्के MLP मॉडल और पहले से तैयार डेटा का इस्तेमाल हुआ।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर सीधे LLM चलाना व्यावहारिक नहीं है। यानी इसे 1 अरब अलग-अलग ChatGPT विंडो की तरह समझना सही नहीं होगा। यह एक विशाल कृत्रिम समाज है, जिसमें AI से सीखे व्यवहार के आधार पर एजेंट प्रतिक्रिया देते हैं।
1 अरब एजेंट वाले नेटवर्क में राय कैसे बदली?
मुख्य प्रयोग के लिए शोधकर्ताओं ने 1 अरब नोड वाला सामाजिक नेटवर्क बनाया। इसमें ऊपर के 20% यानी करीब 20 करोड़ एजेंट influencers थे। बाकी 80 करोड़ एजेंट influences की भूमिका में थे। हर एजेंट को 10,000 World Values Survey प्रोफाइल से चुनी गई जनसांख्यिकीय जानकारी दी गई। प्रयोग में एक बयान था, ‘AI automation से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी होगी।’ एजेंट इस बयान से सहमत, असहमत या तटस्थ हो सकते थे। हर राउंड में influencers के करीब 1% यानी 20 लाख एजेंट चुने गए। उन्होंने अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ बातचीत की। प्रयोग 100 राउंड तक चला।
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AI, फ्लैट अर्थ और मंगल पर भी हुई राय की जांच
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग बयानों के साथ भी प्रयोग दोहराया। इनमें ‘पृथ्वी चपटी है’, ‘50 साल में मंगल पर इंसानी शहर होगा’ और ‘शॉर्ट वीडियो इंसानों का ध्यान कम कर रहे हैं’ जैसे बयान शामिल थे। सिमुलेशन में ज्यादातर एजेंटों ने फ्लैट अर्थ वाले दावे का विरोध किया। मंगल पर भविष्य के शहर वाले बयान पर राय धीरे-धीरे तटस्थता की ओर गई। वहीं शॉर्ट वीडियो के ध्यान पर असर वाले बयान पर सहमति बढ़ी।
शोधकर्ताओं का कहना है कि influencers की शुरुआती राय का व्यापक आबादी की राय पर मापने योग्य असर पड़ा।
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1 अरब AI एजेंट का प्रयोग क्यों अहम है?
पहले LLM आधारित सामाजिक सिमुलेशन आमतौर पर कुछ मिलियन एजेंट से आगे बढ़ने में मुश्किल झेलते थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, छोटे स्तर पर भी ऐसे प्रयोगों में दर्जनों GPU और कई हफ्तों की कंप्यूटिंग लग सकती है। Light Society ने Caching, छोटे AI मॉडल, Compressed Network Storage और लाखों इंट्रक्शन को एक साथ प्रोसेस करने जैसी तकनीकों से यह बोझ कम किया। इस तरह के सिमुलेशन से भविष्य में राय बदलने, भरोसे, झूठी खबर, बाजार, महामारी और दूसरे बड़े सामाजिक सिस्टम पर सिद्धांतों को वास्तविक दुनिया में जांचने से पहले परखा जा सकता है।
लेकिन इसकी सीमा भी साफ है। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि AI से बनी आबादी को असली इंसानों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सर्वे डेटा और AI मॉडल में मौजूद bias सिमुलेशन के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इन निष्कर्षों को अभी परिकल्पना की तरह देखना चाहिए, जिसे वास्तविक दुनिया के डेटा से जांचना जरूरी है।
