Knaken कंगाल, करोड़ों का क्रिप्टो फंड गायब, निवेशकों में मचा हड़कंप

Knaken कंगाल, करोड़ों का क्रिप्टो फंड गायब, निवेशकों में मचा हड़कंप

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July 17, 2026

Knaken Bankrupt: क्या आपका पैसा किसी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित है? नीदरलैंड के क्रिप्टो एक्सचेंज Knaken के दिवालिया होने के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है। रॉटरडैम की अदालत ने कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया है। आरोप है कि ग्राहकों के करीब 7 मिलियन यूरो (लगभग 70 करोड़) का हिसाब नहीं मिल रहा। इस फैसले से करीब 30,000 ग्राहक प्रभावित हुए हैं।

नीदरलैंड के क्रिप्टो एक्सचेंज Knaken को अदालत ने दिवालिया घोषित कर दिया, करीब 30 हजार ग्राहकों के फंड फंस गए हैं, जबकि 7 मिलियन यूरो की रकम का हिसाब नहीं मिल रहा।

Knaken पर क्यों आई दिवालिया होने की नौबत?

डच अदालत ने यह फैसला डच पब्लिक प्रॉसिक्यूशन सर्विस की याचिका पर सुनाया। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब डच वित्तीय नियामक AFM ने कंपनी की वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि कंपनी के पास ग्राहकों के पैसे में बड़ा घाटा है और इसकी जानकारी निवेशकों को नहीं दी गई। यही वजह रही कि Knaken और ग्राहकों के फंड सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई Stichting Knaken Payments दोनों को दिवालिया घोषित कर दिया गया।

30 हजार ग्राहक फंसे, वेबसाइट और ऐप पहले ही बंद

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 30,000 ग्राहक इस संकट से प्रभावित हुए हैं। जून की शुरुआत से ही Knaken की वेबसाइट और मोबाइल ऐप बंद हो गए थे। इसके बाद ग्राहक अपने खाते नहीं देख सके और न ही पैसे या क्रिप्टो निकाल पाए। कंपनी ने बची हुई रकम ग्राहकों में बांटने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत का मानना था कि कंपनी के पास सभी निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं बची है।

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MiCA लाइसेंस नहीं मिलने से बढ़ी मुश्किल

Knaken की परेशानी तब और बढ़ गई जब उसे यूरोपीय संघ के नए MiCA नियमों के तहत जरूरी लाइसेंस नहीं मिला। 1 जुलाई 2025 से यह लाइसेंस सभी क्रिप्टो कंपनियों के लिए अनिवार्य हो गया था। लाइसेंस नहीं मिलने के बाद कंपनी कानूनी रूप से सेवाएं जारी नहीं रख सकी और पूरा प्लेटफॉर्म बंद करना पड़ा। इससे हजारों ग्राहकों का पैसा और डिजिटल एसेट्स फंस गए।

अब चल रही है आपराधिक जांच

दिवालिया प्रक्रिया के साथ-साथ कंपनी के खिलाफ आपराधिक जांच भी जारी है। डच वित्तीय अपराध जांच एजेंसी FIOD ने कंपनी के दफ्तरों पर छापा मारकर कंप्यूटर, मोबाइल और कुछ संपत्तियां जब्त की हैं। अब अदालत की ओर से नियुक्त ट्रस्टी कंपनी की वित्तीय स्थिति की जांच करेगा। इसके बाद तय होगा कि ग्राहकों और अन्य लेनदारों को कितनी राशि वापस मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7 मिलियन यूरो आखिर कहां गए।

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Knaken का मामला दिखाता है कि क्रिप्टो निवेश में नियामकीय मंजूरी और पारदर्शिता कितनी जरूरी है। फिलहाल 30,000 निवेशक अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां गायब हुई रकम का पता लगाने में जुटी हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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