Hyderabad Cyber Fraud: क्या आपकी मेहनत की कमाई कुछ मिनटों में साइबर ठगों के हाथ लग सकती है? आज डिजिटल लेनदेन जितना आसान हुआ है, साइबर अपराध भी उतनी ही तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने पूरे देश में म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि यही दोनों साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हर दिन करोड़ों का नुकसान पहुंचा रहे साइबर ठग
हैदराबाद में आयोजित National Round Table on Digital Trust & Citizen Protection कार्यक्रम में सज्जनार ने कहा कि अकेले हैदराबाद में साइबर ठगी से हर दिन करीब 1 करोड़ का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम पर रोक नहीं लगेगी, तब तक साइबर अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल रहेगा। इस कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों, बैंकिंग विशेषज्ञों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, टेलीकॉम कंपनियों, कानूनी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों समेत 200 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट और घोस्ट सिम?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी चोरी के पैसों को इधर-उधर भेजने के लिए करते हैं। वहीं घोस्ट सिम ऐसे मोबाइल नंबर होते हैं जो गलत या फर्जी पहचान के आधार पर जारी किए जाते हैं। सज्जनार ने कहा कि बैंक, टेलीकॉम कंपनियां, नियामक संस्थाएं और कानून लागू करने वाली एजेंसियां मिलकर ही इन पर प्रभावी कार्रवाई कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां बैंक भरोसे के साथ कह सकें कि उनके यहां कोई म्यूल अकाउंट नहीं है।
READ MORE: Elon Musk बन सकते हैं दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर
1930 हेल्पलाइन याद रखना बेहद जरूरी
साइबर ठगी का शिकार होने पर सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करने की सलाह दी गई। सज्जनार ने इसे “गोल्डन आवर” बताया। उनके अनुसार, समय रहते शिकायत दर्ज कराने पर फर्जी लेनदेन रोकने और पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत में हर दिन 10,000 से ज्यादा साइबर फ्रॉड के मामले सामने आते हैं। वहीं देश में करीब 25 अरब डिजिटल वित्तीय लेनदेन होते हैं।
AI और डीपफेक भी बन रहे नई चुनौती
बैठक में विशेषज्ञों ने AI आधारित फ्रॉड, डीपफेक, पहचान चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी और डिजिटल सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की। सभी विशेषज्ञों ने माना कि सिर्फ तकनीक से साइबर अपराध नहीं रुकेंगे। इसके लिए जागरूकता, मजबूत नियम और सभी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
READ MORE: AI से पूछेंगे ये 5 सवाल तो जाना पड़ेगा जेल!
साइबर अपराध लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्क रहना, संदिग्ध कॉल या लिंक से बचना और जरूरत पड़ने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना सबसे बड़ा बचाव है। डिजिटल दुनिया में सुरक्षा तभी मजबूत होगी, जब तकनीक के साथ जागरूकता भी बढ़ेगी।
