Skyroot Aerospace: क्या भारत का अगला बड़ा टेक्नोलॉजी सितारा स्पेस सेक्टर से निकलेगा? Skyroot Aerospace ने यह सवाल लगभग सच साबित कर दिया है। हैदराबाद की इस निजी स्पेस कंपनी ने 60 मिलियन डॉलर (करीब 570 करोड़ रुपये) की नई फंडिंग हासिल की है। इसके साथ ही कंपनी की वैल्यू 1.1 बिलियन डॉलर पहुंच गई है और यह भारत की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई है।
भारत की स्पेस कंपनी Skyroot Aerospace अब 1.1 बिलियन डॉलर वैल्यू के साथ यूनिकॉर्न बनी, जानें Vikram-1, नई फंडिंग और कंपनी के भविष्य की पूरी कहानी।
Skyroot Aerospace ने कैसे हासिल किया बड़ा मुकाम?
Skyroot Aerospace की शुरुआत 2018 में पूर्व ISRO वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है और इसका मकसद कम लागत में छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष तक पहुंचाना है। इस फंडिंग राउंड में Sherpalo Ventures, GIC, BlackRock, Greenko Group, Arkam Ventures, Playbook Partners और Shanghvi Family Office जैसे बड़े निवेशकों ने हिस्सा लिया। इस निवेश का नेतृत्व Sherpalo Ventures और GIC ने संयुक्त रूप से किया।
छोटे सैटेलाइट लॉन्च पर कंपनी का पूरा फोकस
Skyroot Aerospace निजी लॉन्च व्हीकल विकसित कर रही है। कंपनी ने 2022 में Vikram-S रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया था। इसके साथ ही यह भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च किया।
कंपनी ने कई अहम तकनीकों पर भी काम किया है, जिनमें शामिल हैं:
- Dhawan-1 निजी क्रायोजेनिक इंजन
- Kalam-100 और Kalam-250 सॉलिड फ्यूल मोटर
- 3D प्रिंटेड इंजन टेक्नोलॉजी
इन तकनीकों का उद्देश्य लॉन्च की लागत कम करना और मिशन को ज्यादा तेज व भरोसेमंद बनाना है।
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अब Vikram-1 और Vikram-2 मिशन पर टिकी नजर
कंपनी के सह-संस्थापक और CEO पवन कुमार चंदना के मुताबिक, टीम अब Vikram-1 लॉन्च की तैयारी में जुटी है। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट होगा, जिसे छोटे सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है।
नई फंडिंग का इस्तेमाल इन बड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा:
- Vikram-1 लॉन्च की तैयारी तेज करना
- मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना
- Vikram-2 लॉन्च व्हीकल विकसित करना
कंपनी का कहना है कि Vikram-2 एक 1-टन क्लास लॉन्च व्हीकल होगा, जिसमें एडवांस्ड क्रायोजेनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बड़े स्पेस मिशनों को भी संभालना आसान होगा।
कुछ सालों में दोगुनी से ज्यादा हुई कंपनी की वैल्यू
Skyroot Aerospace की ग्रोथ काफी तेज रही है। 2023 में कंपनी की वैल्यू करीब 519 मिलियन डॉलर थी, जो अब बढ़कर 1.1 बिलियन डॉलर हो गई है। यानी कुछ ही वर्षों में इसकी वैल्यू दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई। इस नई फंडिंग के बाद कंपनी अब तक कुल 160 मिलियन डॉलर (करीब 1,500 करोड़ रुपये) से अधिक निवेश जुटा चुकी है। यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते निजी स्पेस सेक्टर के लिए भी बड़ा संकेत मानी जा रही है।
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Skyroot Aerospace की यह सफलता दिखाती है कि भारत की निजी स्पेस कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना रही हैं। Vikram-1 और Vikram-2 जैसे मिशन सफल रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत का निजी स्पेस सेक्टर दुनिया के बड़े खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दे सकता है।
