Meta space solar energy

Space Solar Power: क्या मेटा का यह ‘जादुई’ सैटेलाइट बदल देगा एआई की दुनिया?

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April 28, 2026

Meta space solar energy: अब ऊपर में बनेगी बिजली और नीचे आएगें काम। इस बात को सुनकर आप हैरान हो रहे होंगे या फिर किसी साइंस फिक्शन मूवी की स्क्रिप्ट जैसा लगने लगा होगा। लेकिन यह अब वास्तव में हकीकत बनने जा रही है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा अब सोशल मीडिया से दो कदम आगे छलांग लगाते हुए उर्जा के क्षेत्र में ब्रह्मांडीय स्तर नया दांव खेलने की तैयारी में है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

​मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा अब अंतरिक्ष में सैटेलाइट तैनात कर सौर ऊर्जा को सीधे धरती पर मौजूद डेटा सेंटर्स तक बीम करेगी। जानिए कैसे काम करेगी काम?

​जुकरबर्ग का अंतरिक्ष से बिजली मिशन

​एआई के आने के बाद उसकी बिजली की भूख को मिटाने की जिम्मेदारी मेटा ने अपने कंधे पर लेने की तैयारी में है। वे अपनी नजरें आसमान की ओर मोड़ ली हैं। एआई डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए जितनी बिजली चाहिए, वह जमीन पर मौजूद संसाधनों से पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। यही वजह है कि मेटा Overview Energy के साथ मिलकर अंतरिक्ष में ऐसे सैटेलाइट तैनात करने जा रहा है, जो 22,000 मील ऊपर भू-स्थैतिक कक्षा Geosynchronous Orbit में रहकर चौबीसों घंटे सूरज की रोशनी सोखेंगे। यह तकनीक बादलों और रात की बाधाओं को दरकिनार कर बिजली की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करेगी।

वायरलेस पावर ग्रिड से निर्बाध बिजली

​इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी ट्रांसमिशन तकनीक है। अंतरिक्ष में इकट्ठा की गई सौर ऊर्जा को Low-intensity near-infrared light के रूप में धरती पर भेजा जाएगा। यह एक तरह का वायरलेस पावर ग्रिड होगा। जब जमीन पर मौजूद सोलर फार्म्स रात के अंधेरे में ठप पड़े होते हैं, तब ये सैटेलाइट्स ऊपर से उन पर रोशनी की बौछार करेंगे, जिससे बिजली का उत्पादन कभी नहीं रुकेगा।

दो दिग्गज लेकिन राह अलग-अलग

​जहाँ एआई की रेस में गूगल और मेटा आमने-सामने हैं, वहीं ऊर्जा के समाधान में दोनों की सोच अलग है। गूगल का विजन थोड़ा और साहसी है। वे अपने डेटा सेंटर्स को ही अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहे हैं ताकि वे सीधे स्रोत से ऊर्जा ले सकें। इसके विपरीत, मेटा का मानना है कि डेटा सेंटर जमीन पर ही रहने चाहिए और ऊर्जा को ऊपर से नीचे लाना ज्यादा व्यावहारिक है। यह ‘पावर टू डेटा’ बनाम ‘डेटा टू पावर’ की एक दिलचस्प जंग है।

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लॉन्ग-टर्म स्टोरेज का बैकअप

​कंपनी का मकसद बिजली बनाना ही नहीं उसे बचाकर रखना भी जरूरी है। मेटा ने Noon Energy के साथ हाथ मिलाया है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा Renewable Energy को कई दिनों तक स्टोर किया जा सके। इसके लिए सॉलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल्स और कार्बन-आधारित स्टोरेज तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसके बारे में दावा यह किया जा रहा है कि यह तकनीक पारंपरिक बैटरियों की तुलना में कहीं अधिक समय तक ऊर्जा को सुरक्षित रख सकती है, जिससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बिना किसी रुकावट के चलाया जा सकेगा।

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कंपनी ने 2028 तक की समय-सीमा तय की

मेटा और उसके पार्टनर्स ने 2028 को अपनी समय-सीमा तय की है। Overview Energy अपना पहला ऑर्बिटल प्रदर्शन Orbital Demonstration इसी साल करने जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो इतिहास में पहलीबार अंतरिक्ष से किसी सोलर फार्म तक वायरलेस ऊर्जा भेजने का प्रयास होगा।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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