AI Student Career Guide : कुछ साल पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ तकनीक से जुड़ी चर्चा का विषय था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज AI सीखना सिर्फ एक अतिरिक्त स्किल नहीं, बल्कि करियर को सुरक्षित रखने का तरीका बनता जा रहा है। कॉलेज के छात्र प्लेसमेंट से पहले AI की मदद से मॉक इंटरव्यू दे रहे हैं। नौकरीपेशा लोग ऑफिस के बाद AI कोर्स कर रहे हैं। कॉमर्स और मैनेजमेंट के छात्र भी AI सीखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
भारत में इस समय AI सीखने की एक बड़ी लहर देखने को मिल रही है। इसकी वजह साफ है। युवाओं को लगता है कि आने वाले समय में वही लोग नौकरी की दौड़ में आगे रहेंगे जो AI का सही इस्तेमाल करना जानते होंगे।
भारत में AI Courses का नया क्रेज, क्या ये स्टूडेंट्स को सच में नौकरी दिला पा रहे हैं? जानें ताजा रिपोर्ट।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है AI सीखने का ट्रेंड
ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म Coursera के आंकड़े इस बदलाव की बड़ी तस्वीर दिखाते हैं। भारत में अब 3.42 करोड़ (34.2 मिलियन) से ज्यादा लोग Coursera पर सीख रहे हैं। इसके साथ भारत इस प्लेटफॉर्म का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यह संख्या पूरे यूरोप के कुल शिक्षार्थियों से भी ज्यादा है। पिछले एक साल में भारत में शिक्षार्थियों की संख्या 21 प्रतिशत बढ़ी है। Generative AI कोर्स की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में हर मिनट तीन लोग ऐसे कोर्स में दाखिला ले रहे हैं। साल 2023 में यह आंकड़ा हर चार मिनट में एक दाखिले का था।
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अब सिर्फ इंजीनियर नहीं, हर क्षेत्र के छात्र सीख रहे AI
पहले AI को केवल इंजीनियरिंग और तकनीकी छात्रों का विषय माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। Unstop के संस्थापक और CEO अंकित अग्रवाल के मुताबिक, मैनेजमेंट, कॉमर्स और छोटे शहरों के छात्र भी बड़ी संख्या में AI सीख रहे हैं। Masai School के सह-संस्थापक प्रतीक शुक्ला बताते हैं कि हाल के महीनों में उनके यहां दाखिला लेने वाले छात्रों में 20 से 30 प्रतिशत लोग गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि से हैं। लोग अब AI को सिर्फ कोडिंग नहीं, बल्कि काम को बेहतर और तेज बनाने वाले टूल के रूप में देख रहे हैं।
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युवाओं को क्यों लग रहा है AI जरूरी?
AI सीखने के पीछे सबसे बड़ा कारण भविष्य की नौकरी को लेकर चिंता है। युवाओं को लगता है कि आने वाले समय में कंपनियां उन्हीं लोगों को प्राथमिकता देंगी जो AI टूल्स के साथ काम करना जानते हैं। 23 साल की सुहानी सिंह बताती हैं कि इंटरव्यू के दौरान वह अक्सर घबरा जाती थीं। बाद में उन्होंने AI आधारित मॉक इंटरव्यू प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू किया। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और जवाब देने का तरीका बेहतर हुआ।
सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, असली स्किल की मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल कोर्स पूरा कर लेने से काम नहीं चलेगा। कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद कर रही हैं जो AI का उपयोग करके वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें। यही वजह है कि छात्रों का रुझान सिर्फ वीडियो देखकर सीखने के बजाय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की ओर बढ़ रहा है। मॉक टेस्ट, प्रोजेक्ट, हैकाथॉन और AI सिमुलेशन जैसे तरीकों को ज्यादा महत्व मिल रहा है।
एक बड़ी चुनौती भी मौजूद है
AI सीखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रोजगार के लिहाज से अभी भी एक बड़ा अंतर मौजूद है। Unstop Talent Report 2026 के मुताबिक, केवल 36 प्रतिशत HR लीडर्स ही उम्मीदवारों को पहले दिन से नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार मानते हैं। यानी सिर्फ AI के बारे में जानकारी होना काफी नहीं है। जरूरी यह है कि छात्र सीखी हुई चीजों को वास्तविक काम में लागू करना भी जानें।
सही AI कोर्स चुनना क्यों जरूरी है?
आज बाजार में हजारों AI कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें मुफ्त YouTube वीडियो से लेकर IIT समर्थित महंगे सर्टिफिकेशन प्रोग्राम तक शामिल हैं। ऐसे में छात्रों को कोर्स चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले यह जरूर देखें कि वहां लाइव क्लास, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट, मेंटरशिप और सवाल पूछने की सुविधा मौजूद है या नहीं।
