Share Market India: क्या पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ गया है? आज सुबह बाजार खुलते ही ऐसा ही नजारा देखने को मिला। ईरान और इजरायल के बीच बढ़े सैन्य टकराव ने दुनियाभर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा, जहां सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा टूट गया और निफ्टी 23,100 के करीब फिसल गया।
ईरान-इजरायल तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखा, Sensex 800 अंक से ज्यादा टूटा और Nifty में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। जानिए बाजार में आज की बड़ी हलचल।
शेयर बाजार में ताज़ा गिरावट, निवेशकों को बड़ा झटका
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने बेहद कमजोर शुरुआत की। सुबह BSE सेंसेक्स 73,400 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 करीब 250 अंक टूटकर 23,100 के आसपास कारोबार करता दिखा। प्री-ओपनिंग सत्र में सेंसेक्स 487.52 अंक यानी 0.66 फीसदी की गिरावट के साथ 73,755.82 पर था। वहीं निफ्टी 257.95 अंक यानी 1.10 फीसदी गिरकर 23,108.75 पर पहुंच गया।
ईरान-इजरायल तनाव बना गिरावट की बड़ी वजह
बाजार में इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं। इसके बाद क्षेत्र में शांति वार्ता और युद्धविराम की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो वैश्विक व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर के बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता कम हुई है।
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एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली
भारतीय बाजार अकेला नहीं है। एशिया के कई बड़े बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
- दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 9% टूटा
- जापान का Nikkei 225 चार फीसदी से ज्यादा गिरा
- हांगकांग का Hang Seng करीब 1.5% नीचे आया
इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी बड़ी बिकवाली देखने को मिली थी। Nasdaq 4.18 फीसदी, S&P 500 2.64 फीसदी और Dow Jones 1.35 फीसदी टूटकर बंद हुए थे। एक बाजार विशेषज्ञ ने कहा, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सबसे पहले जोखिम वाली संपत्तियों से दूरी बनाते हैं। फिलहाल बाजार की नजर पूरी तरह पश्चिम एशिया की घटनाओं पर है।
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कच्चे तेल की कीमत बढ़ी, आगे इन आंकड़ों पर नजर
तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी से ज्यादा उछलकर 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि महंगा तेल महंगाई और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है।
- इस सप्ताह निवेशकों की नजर इन प्रमुख आंकड़ों पर रहेगी।
- 12 जून को भारत की मई महंगाई दर
- विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े
- अमेरिका की उपभोक्ता महंगाई रिपोर्ट
- चीन के आर्थिक आंकड़े
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और हालिया RBI नीतियां बाजार को कुछ सहारा दे सकती हैं।
