PLI 2.0 Smartphone Scheme: भारत सरकार मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत बनाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का नया और ज्यादा महत्वाकांक्षी वर्जन लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई PLI 2.0 स्कीम का फोकस स्मार्टफोन निर्माण में घरेलू वैल्यू एडिशन को 55 प्रतिशत से ज्यादा तक पहुंचाने पर हो सकता है।
सरकार इस नई स्कीम को पहले से चल रही 40,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के साथ जोड़ने की योजना बना रही है। इसका मकसद स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पार्ट्स की देश में ही मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई को बढ़ावा देना है।
क्या भारत में मोबाइल के पार्ट्स अब ज्यादा बनेंगे? सरकार PLI 2.0 स्कीम के जरिए स्मार्टफोन निर्माण में घरेलू वैल्यू एडिशन 55% से ज्यादा करने की तैयारी में है।
क्यों जरूरी पड़ी PLI 2.0?
भारत में मोबाइल निर्माण तेजी से बढ़ा है और देश अब स्मार्टफोन उत्पादन व निर्यात का बड़ा केंद्र बन चुका है। इसके बावजूद सरकार को चिंता है कि अब भी कई महंगे और जरूरी कंपोनेंट्स के लिए भारत विदेशी आयात पर निर्भर है।
पहली PLI स्कीम अप्रैल 2020 में शुरू की गई थी, जिसके लिए करीब 40,995 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। इसका लक्ष्य घरेलू वैल्यू एडिशन को 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंचाना था। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल तक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में लोकल वैल्यू एडिशन सिर्फ 18 से 20 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है।
READ MORE: स्मार्टफोन कंपनियों से ‘सीक्रेट कोड’ मांगने की खबरें झूठी
लोकल मैन्युफैक्चरिंग में सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन के डिस्प्ले असेंबली, कैमरा मॉड्यूल और चिपसेट जैसे महंगे कंपोनेंट अब भी विदेशों से आयात किए जा रहे हैं। ये पार्ट्स किसी भी स्मार्टफोन की कुल लागत का करीब 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यही वजह है कि देश में लोकलाइजेशन की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
READ MORE: Oppo Find X9 सीरीज के नए फोन लॉन्च! जानें फीचर्स
PLI 2.0 में क्या हो सकता है खास?
नई स्कीम में सरकार इंसेंटिव सिस्टम को थोड़ा बदल सकती है। अब सिर्फ बिक्री बढ़ाने के बजाय स्थानीय स्तर पर कंपोनेंट्स की खरीद और मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है। जो कंपनियां लिथियम-आयन बैटरी, डिस्प्ले असेंबली और दूसरे जरूरी पार्ट्स भारत में बनाएंगी या स्थानीय स्तर पर खरीदेंगी, उन्हें अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि ECMS के तहत मंजूर 75 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में से कई इस साल के आखिर तक उत्पादन शुरू कर सकती हैं, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग को और रफ्तार मिलेगी। सरकार मौजूदा PLI स्कीम के कुछ अहम हिस्सों को जारी रखने की भी योजना बना रही है। अब तक इस योजना के तहत 17,519 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जबकि उत्पादन 11.01 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
