Harvard AI study: हार्वर्ड और बेथ इज़राइल डिकनेस मेडिकल की एक स्टडी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब डॉक्टर से बढ़ियां डायग्नोसिस कर सकता है। शोध के मुताबिक एआई ने दो इंसानी डॉक्टरों के मुकाबले इमरजेंसी रूम में ज़्यादा सटीक डायग्नोसिस दिए। तो आइए जानते हैं और अधिक जानकारी विस्तार से।
क्या AI डॉक्टरों से बेहतर डायग्नोसिस कर सकता है? नई स्टडी ने चौंकाया, लेकिन सच्चाई जानना भी जरूरी है। पूरा विश्लेषण पढ़ें।
कम जानकारी में एआई की ताकत
रिसर्च में पाया गया है कि जब मरीज के बारे में जानकारी सीमित होती है। तब एआई अपनी विशेष क्षमता की वजह से मरीजों की बीमारी अनुमान लगा लेता है। स्टडी इस हफ़्ते ‘साइंस’ में छपी है। रिसर्च करने वालों ने बताया कि उन्होंने कई तरह के प्रयोग किए ताकि यह मापा जा सके कि OpenAI के मॉडल इंसानी डॉक्टरों के मुकाबले कैसे हैं। इस दौरान बेथ इज़राइल के इमरजेंसी रूम में आए 76 मरीज़ों पर ध्यान दिया। इसमें दो इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर द्वारा गिए गए डायग्नोसिस की तुलना ओपनएआई के 01 और 40 मॉडल द्वारा दिए गए डायग्नोसिस से की है। जिसकी बाद में जांच हुई। लेकिन डॉक्टर को यह नहीं पता चल सका कौन से डायग्नोसिस है और कौन से इंसान ने किए हैं।
AI मॉडल 67 प्रतिशत बिल्कुल सही डायग्नोसिस
स्टडी मॉडल ने लगभग 67 प्रतिशत में बिल्कुल सही डायग्नोसिस दिया। एआई के सामने डॉक्टरों स्कोर थोड़ा कम रहा। यह आंकड़ा आकर्षक जरूर है लेकिन इसे अंतिम सत्य भी नहीं माना जा सकता। डॉक्टरों का काम केवल बीमारी पहचान करना नहीं, मरीज की स्थिति को समझना जरूरी है। उसका आंकलन करना और इलाज की दिशा भी तय करना होता है। जो केवल डेट सं संभव नहीं है। दोनों डॉक्टरों ने ने 50-55 प्रतिशत तक डायग्नोसिस किया।
असली क्षमता के लिए गहराई से शोध की जरूरत
स्टडी के मुख्य लेखकों में से एक अर्जुन मनराई प्रेसवार्ता कर यह जानकारियां दी हमने एआई मॉडल हर पैमाने जांचा, परखा और पिछले सभी मॉडल और डॉक्टर के नतीने की पीछे छोड़ दिया। हालांकि इसमे यह दावा नहीं किया गया कि एआई इमरजेंसी रूम में ज़िंदगी और मौत से जुड़े असली फ़ैसले लेने के लिए तैयार है। इसके लिए और अधिक असली क्षमता को समझने के लिए गहराई शोध करने की आवश्यकता है। अभी की स्टडीज़ बताती हैं कि मौजूदा फ़ाउंडेशन मॉडल्स, टेक्स्ट के अलावा दूसरी तरह की जानकारी पर तर्क करने में सीमित हैं।
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डॉक्टर एडम रोडमैन ने दी चेतावनी
बेथ इज़राइल के डॉक्टर एडम रोडमैन ने गार्डियन को चेतावनी दी कि एआई से होने वाले निदान के मामले में अभी जवाबदेही के लिए कोई औपचारिक ढांचा मौजूद नहीं है। मरीज़ तो अब भी चाहते हैं कि इंसान ही उन्हें ज़िंदगी और मौत से जुड़े मुश्किल इलाज के फ़ैसलों में रास्ता दिखाएँ। वहीं, इमरजेंसी डॉक्टर क्रिस्टन पैंथागानी ने कहा कि यह एआई पर एक दिलचस्प स्टडी है, जिसकी वजह से कुछ बहुत ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई सुर्ख़ियाँ बनी हैं। क्योंकिं तुलना इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टरों से की गई थी, न कि इमरजेंसी रूम के डॉक्टरों से। उन्होंने यह भी कहा कि इसकी तुलना असल मायने उस फील्ड में काम करनेवाले से करना चाहिए।
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मुकाबला नहीं सहयोग जरूरी
यह शोध यह नहीं कहता है कि एआई अब डॉक्टरों की जगह ले सकता है। यह तो संकेत देता है कि भविष्य में एआई एक मजबूत सहायक के तौर पर उभर सकता है। बशर्ते इसकी इस्तेमाल सही दिशा में होनी चाहिए। एआई डॉक्टर को सही निर्णय लेने में मदद भी कर सकता है। इससे साफ है कि एआई ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने की एक कोशिश की है।
इस स्टडी में इंटरनल मेडिसिन के अटेंडिंग डॉक्टरों द्वारा समस्या का निदान दिया गया था। जिसमें यह भी बातें निकल कर सामने आई कि मरीज आज भी अपने जीवन से जुड़े निर्णय में इंसान की सलाह को प्राथमिकता देती है।
