Iran US Conflict: मिडिल ईस्ट में अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं। दो बार शांति बैठक भी बेनतीजा निकल चुका है। इसी बीच ईरान ने एक नई कूटनीतिक पहल की है। ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से खोलने की पेशकश की है। हालांकि इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम को अलग रखा गया है। तेहरान ने कहा है कि पहले आर्थिक नाकेबंदी हटाई जाए। इसके बाद ही आगे बात संभव है। यानी अभी भी ईरान अपने सख्त शर्तों अडिग है। ईरान अब विश्वरस्तर पर समर्थन जुटाने में लगा है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री Abbas Araghchi रूस पहुंच चुके हैं। उनकी मुलाकात Vladimir Putin से होनी तय है। यह बैठक सेंट पीटर्सबर्ग में हो रही है। इस मुलाकात बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस विषम परिस्थिति में ईरान चाहता है कि रूस खुलकर समर्थन करे। माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान क्षेत्रीय हालात और युद्ध की स्थिति पर गहन चर्चा हो सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रूस की एंट्री, कूटनीतिक प्रयास तेज। क्या हॉर्मुज़ स्ट्रेट पर संकट टलेगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
अमेरिका-ईरान वार्ता में गतिरोध
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिलहाल ठप पड़ी है। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी दिख रही है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी मांगें बहुत ज्यादा थीं। इसी कारण पिछली वार्ता नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। तेहरान ने यह भी दोहराया कि स्ट्रेट् ऑफ़ होमूज़् की सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। यहां किसी भी तरह का संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। जमीनी हालात भी लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वही, दूसरी तरफ दक्षिणी लेबनान में हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सीजफायर के बावजूद कार्रवाई जारी है। कई लोग इस हमले में हताहत भी हुए हैं। ऐसी सूचना मिल रही है। जिनमें महिला एवं बच्चे शामिल है। Hezbollah ने इजरायली सेना पर जवाबी हमले करने का दावा किया है। इससे संघर्ष और तेज होता दिख रहा है।
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अमेरिका का सख्त संदेश
इस तनातनी महौल के बीच एकबार फिर अमेरिकी राजनीति से भी कड़े संकेत मिल हैं। Donald Trump ने कहा है कि ईरान चाहे तो बातचीत कर सकता है। लेकिन साथ ही उन्होंने सख्त रुख भी दिखाया है। अमेरिका ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण दौरा रद्द किया है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी कूटनीति और दबाव दोनों का खेल साथ-साथ खेल रहा है। एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं। दूसरी तरफ जमीनी संघर्ष थम नहीं रहा है। अभी किसी समाधान के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं। अभी भी पूरी दुनियां बड़े फैसले की इंतजार में है।
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