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नौकरी नहीं, मौके कम कर रहा AI! युवाओं के लिए नई चुनौती!

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April 23, 2026

Rishi Sunak on AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन इसका असर भी उतनी साफ दिखाई दे रही है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो इससे प्रभावित नहीं है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री Rishi Sunak ने इसी बदलाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि एआई नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं कर रहा। लेकिन यह नौकरी पाने का तरीका बदल रहा है। खासकर युवाओं के लिए शुरुआत करना पहले से ज्यादा कठिन होता जा रहा है।

ऋषि सुनक के मुताबिक AI जॉब खत्म नहीं कर रहा, बल्कि युवाओं के लिए एंट्री मुश्किल बना रहा है। जानिए पूरा विश्लेषण।

कंपनियों की बदलती कार्यशैली

एआई के रेस में कंपनी कंपनियां अपनी कार्यशैली को बदलने के मूड हैं। खासकर टेक कंपनियां। वे अब वे कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करना चाहती हैं। एआई इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण है। इससे काम तेजी से होता है। लागत भी कम होती है। इसलिए कंपनियां नई भर्ती से बच रही हैं। कई बड़े कॉर्पोरेट अब बिना स्टाफ बढ़ाए भी ग्रोथ कर रहे हैं। इसी सोच को flat is the new up कहा जा रहा है, जो आज के बिजनेस ट्रेंड को दिखाता है।

युवाओं पर सीधा असर

इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ रहा है। उनके लिए एंट्री लेवल जॉब्स धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। लॉ, अकाउंटिंग और क्रिएटिव इंडस्ट्री जैसे क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। पहले यहां नए लोगों के लिए कई मौके होते थे। अब कंपनियां ट्रेनिंग पर खर्च करने से बच रही हैं। इससे फ्रेशर्स के लिए मौके और सीमित हो रहे हैं। इस चुनौती को देखते हुए समाधान भी सुझाए जा रहे हैं।

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टैक्स सिस्टम में बदलाव का सुझाव

ऋषि सुनक ने टैक्स सिस्टम में बदलाव की बात कही है। उनका सुझाव है कि रोजगार पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे खत्म किया जाए। इसकी जगह कंपनियों के मुनाफे पर टैक्स बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनियों को ज्यादा लोगों को नौकरी देने का प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआई को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा रहा है। इसे एक बड़े अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह कर्मचारियों की क्षमता बढ़ा सकता है। नौकरियां भी पैदा कर सकता है। लेकिन इसके लिए सही नीतियां और स्पष्ट दिशा जरूरी है।

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रेगुलेशन की बढ़ती जरूरत

वहीं, एआई के प्रभाव को देखते हुए रेगुलेशन की जरूरत भी बढ़ गई है। केवल कंपनियों पर निर्भर रहना सही नहीं माना जा रहा। Anthropic का नया एआई मॉडल Claude Mythos इस बहस को और तेज करता है। यह साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। लेकिन इसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी बना रहता है। इसलिए मजबूत निगरानी और नियम जरूरी हो गए हैं।

एआई से बदलाव तो हो रहा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार, कंपनियों और समाज को मिलकर काम करना होगा।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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