BrainTech funding : यूरोप अब BrainTech सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। न्यूरोसाइंस और AI Startups के क्षेत्र में रिसर्च तो पहले से मजबूत है। लेकिन इसे बड़े बिजनेस में बदलने की चुनौती बनी हुई थी। Newfund ने अपने खास HEKA फंड के जरिए 60 मिलियन यूरो जुटा लिए हैं। इसे ब्रेनटेक स्टार्टअप्स में निवेश करेगा। इसकी शुरुआत 2023 में 20 मिलियन यूरो से हुई थी और अब यह अपने लक्ष्य तक पहुंच चुका है। तो आइए जानते हैं आखिर कंपनी इतनी बड़ी फंड जुटाकर आगे करना क्या चाहती है।
यूरोप अब AI और न्यूरोसाइंस स्टार्टअप्स में करेगा बड़ा निवेश, 60 मिलियन यूरो फंड से मिलेगी नई रफ्तार। जानिए इसके पीछे की कहानी।
BrainTech पर पहला यूरोपीय स्टर्टअप
HEKA यूरोप का पहला ऐसा फंड है जो पूरी तरह BrainTech पर केंद्रित है। इसकी पोर्टफोलियों कंपनी पहले से ही यूएस के अस्पतालों और क्लीनिकों में सेवाएं दे रही है। इसमें AI डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल थेरेपी, न्यूरोलॉजी, साइकियाट्री और एडवांस इमेजिंग जैसे सेक्टर शामिल हैं। फंड का लक्ष्य करीब 25 स्टार्टअप्स को सपोर्ट करना है। इस फंड में करीब 100 फैमिली ऑफिस और एंटरप्रेन्योर्स ने निवेश किया है। पहले न्यूफंड से जुड़े कई सफल फाउंडर्स ने भी इसमें दोबारा निवेश किया है। इससे इस पहल को मजबूत भरोसा मिला है। मैनेजिंग डायरेक्टर Francois Veron ने कहा है कि पुराने निवेशकों का एकबार फिर साथ मिला है।
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यूरोप से अमेरिका तक का सफर
HEKA का लक्ष्य यूरोपीय स्टार्टअप्स को अमेरिकी बाजार तक पहुंचाना है। इसके लिए FDA अप्रूवल, फंडिंग और कस्टमर बेस बनाने में मदद दी जाएगी। यूरोप में INSERM, Inria और बड़े हॉस्पिटल्स जैसे संस्थानों में शानदार रिसर्च होती है। लेकिन इसका आर्थिक लाभ अक्सर अमेरिका को मिल जाता है। हेका इसी अंतर को भरने की कोशिश कर रहा है। हेका अब तक 9 कंपनियों में निवेश कर चुका है। इनमें मेडिकल AI, डायग्नोस्टिक्स और थेरेपी से जुड़े स्टार्टअप्स शामिल हैं। कुछ कंपनियों को अमेरिका के स्टैनफोर्ड StartX जैसे प्रोग्राम में भी जगह मिली है। अब फंड के पूरा होने के बाद न्यूफंड बाकी स्टार्टअप्स में निवेश जारी रखेगा।
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BrainTech में बढ़ती ग्लोबल रेस
आंकड़ों की मानें तो ब्रेनटेक क्षेत्र में 2025 में 4.2 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ। जिसमें से ज्यादातर हिस्सा अमेरिका को मिला। 2026 की शुरुआत में भी यह ट्रेंड जारी है। इससे साफ है कि इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। बता दें कि यह आंकड़े न्यूफंड के अपने आंकड़े हैं और इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
अगर यह पहल सफल होती है, तो भविष्य में एआई और न्यूरोसाइंस में यूरोप अमेरिका को कड़ी टक्कर दे सकता है।
