SIM binding delay: केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए प्रस्तावित SIM binding गाइडलाइन को फिलहाल टाल दिया है। Department of Telecommunications ने इस नियम की डेडलाइन बढ़ाकर अब 31 दिसंबर कर दी है। पहले इसे मार्च के अंत तक लागू किया जाना था। इस फैसले से यूजर्स और कंपनियों दोनों को राहत मिली है।
– टेक कंपनियों की तकनीकी दिक्कतों के चलते SIM बाइंडिंग नियम टला, अब साल के अंत तक बिना SIM भी चलते रहेंगे मैसेजिंग ऐप्स।
बिना SIM भी जारी रहेगा इस्तेमाल
इस फैसले का सीधा फायदा यूजर्स को मिला है। अब WhatsApp और Telegram जैसे ऐप्स बिना एक्टिव SIM के भी चलते रहेंगे। अब फोन में सिम नहीं रहने पर भी मैसेंजिक जारी रख सकते हैं। बता दें कि पहले नियम लागू होने पर कुछ में खुद ही लॉग आउट हो सकती थी। इस फैसले के बाद बार- बार लॉगिन करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
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साइबर फ्रॉड रोकने के लिए लाया गया था नियम
SIM बाइंडिंग गाइडलाइन लागू करने के पीछे सरकार का साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड पर अंकुश लगाना था। कई बार तो यह भी देखा गया कि सिम हटाने के बाद भी एकाउंट एक्टिन दिखाई देते थे। जिसका फायदा साइबर आपराधी उठाते थे। यही वजह थी कि सरकार इस नियम को लागू कर इस अंतर को सदा के लिए खत्म कर देना चाहती थी। हालांकि सरकार टेक कंपनियों को सिस्टम अपडेट और सुरक्षा सुधार के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अब कंपनियां इस नियम को लागू करने के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगी। पहले की डेडलाइन काफी नजदीक थी, जिससे कंपनियों को तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं।
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तकनीकी चुनौतियां बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार के इस कदम से कई बड़े टेक दिग्गज नाराज थे। उन्होंने इस फैसले पर आपत्ति भी दर्ज की थी। ऐप्पल ने तो खुलकर अपना पक्ष रखा था। फिलहाल,कुछ दिनों के लिए इसे टाल दिया गया है। लेकिन अभी भी यह खत्म नहीं हुई है। जब तक पूर्ण रूप से इसपर कोई निर्णय नहीं आ जाता है तब तक यूजर्स की चिंता बनी रह सकती है लेकिन इस राहत देनेवाली बात यह है कि फौरन उन्हें इन समस्याओं गुजरना नहीं पड़ेगा।
