AI Cancer Treatment: ऑस्ट्रेलिया के एक उद्यमी पॉल कोनिंगहैम ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसमें AI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि जीवन बचाने का भी एक मजबूत साधन बन सकता है। जब उनके 5 साल के रेस्क्यू डॉग ‘रोसी’ को टर्मिनल कैंसर का पता चला, तो उन्होंने हार मानने की बजाय इलाज का नया रास्ता खोजने का फैसला किया। रोसी को उसके पैर में मास्ट सेल ट्यूमर हुआ था, जो कुत्तों में सबसे आम स्किन कैंसर माना जाता है। डॉक्टरों ने कहा कि उसकी जिंदगी अब सिर्फ कुछ महीनों की है। ऐसे में पॉल ने उम्मीद नहीं छोड़ी और नए इलाज की तलाश शुरू कर दी।
क्या AI सच में जान बचा सकता है? इस रिपोर्ट में एक रेस्क्यू डॉग के कैंसर इलाज की कहानी है, जिसमें ChatGPT और वैज्ञानिकों ने मिलकर नया इलाज तैयार किया।
AI टूल्स का लिया सहारा
पॉल ने पारंपरिक इलाज के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने ChatGPT और AlphaFold जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल किया, इसके अलावा उन्होंने वैज्ञानिकों की भी मदद ली। उनका लक्ष्य था रोसी के लिए एक खास mRNA वैक्सीन बनाना, जो उसके कैंसर के अनुसार बिल्कुल पर्सनलाइज्ड हो। इस काम में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के कम्प्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट मार्टिन स्मिथ भी जुड़े, जिन्होंने इस रिसर्च में पॉल का सहयोग किया।
The coolest meeting I had this week with was Paul, who used ChatGPT and other LLMs to create an mRNA vaccine protocol to save his dog Rosie. It is amazing story.
“The chat bots empowered me as an individual to act with the power of a research institute – planning, education,… https://t.co/akgD2Wz7d0
— Sam Altman (@sama) March 27, 2026
ChatGPT बना डिजिटल रिसर्च असिस्टेंट
OpenAI के CEO ने इस पूरे मामले को अपनी सबसे दिलचस्प मीटिंग बताया।उन्होंने कहा कि पॉल ने ChatGPT जैसे टूल्स की मदद से, खुद को एक रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी क्षमताओं से प्रभावी ढंग से लैस कर लिया था। पॉल के अनुसार, AI ने उन्हें प्लानिंग, डेटा समझने, ट्रबलशूटिंग, साइंटिफिक डिजाइन और कई जटिल कामों में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि इंसान हर स्टेप पर शामिल थे, लेकिन AI ने काम को तेज और आसान बना दिया।
कैसे बनी कस्टम mRNA वैक्सीन?
सबसे पहले टीम ने रोसी के ट्यूमर का DNA सीक्वेंस किया और उसे डिजिटल डेटा में बदला। इसके बाद AI की मदद से इस डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया। जैसे कि ChatGPT ने ट्यूमर के खास मार्कर पहचानने में मदद की और AlphaFold ने कैंसर प्रोटीन की संरचना समझने में सहायता की। इन सभी जानकारियों के आधार पर एक खास mRNA वैक्सीन तैयार की गई। यह वैक्सीन पूरी तरह रोसी के कैंसर के अनुसार बनाई गई थी।
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इलाज की पूरी योजना में AI की भूमिका
AI सिर्फ वैक्सीन बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने पूरे ट्रीटमेंट प्लान में मदद की। इसमें यह तय करना शामिल था कि कौन सी दवाएं कब दी जाएं, वैक्सीन को कैसे कॉम्बिनेशन में इस्तेमाल किया जाए और इलाज को सुरक्षित और असरदार कैसे बनाया जाए।
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विशेषज्ञों की राय
MD Anderson Cancer Centre के डॉक्टर स्टीवन ह्सेशेंग लिन ने इस मामले को बहुत खास बताया। उन्होंने कहा कि यह दिलचस्प है कि कैसे ChatGPT ने RNA वैक्सीन डिजाइन करने में मदद की और इसे तेजी से लागू किया गया। यह कहानी दिखाती है कि AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस में एक बड़ा बदलाव ला रहा है।
