फर्जी वीडियो पर लगाम, YouTube लाया जबरदस्त AI टूल

फर्जी वीडियो पर लगाम, YouTube लाया जबरदस्त AI टूल

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March 12, 2026

YouTube deepfake detection tool:  दिन-प्रतिदिन social media, ऑनलाइन दुनिया में बढ़ते डीपफेक वीडियो को मद्देनजर रखते हुए YouTube ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने डीपफेक को रोकने के लिए नया AI टूल शुरू किया है। इसका नाम लाइकनेस डिटेक्शन रखा है। यह टूल नकली वीडियो की पहचान करने में मदद करेगा। तो आइए जानते हैं काम करने के तरीके और इनसे किन-किन लोगों के लिए होगा खास।

ऑनलाइन गलत जानकारी और पहचान के दुरुपयोग को रोकने के लिए YouTube ने AI तकनीक से लैस नया सिस्टम। जानिए कैसे करती है काम।

Content ID की तरह काम करेगा सिस्टम

यह तकनीक YouTube के Content ID सिस्टम की तरह काम करती है। Content ID कॉपीराइट वाले वीडियो और ऑडियो ढूंढता है। नया सिस्टम चेहरे और रूप की समानता सूक्ष्मता से पहचानता है। अगर ऐसा कोई वीडियो मिलता है उस वीडियो की समीक्षा कर सकता है। फिर संबंधित व्यक्ति से उसे हटाने का आग्रह कर सकता है।

क्यों डीपफेक बनता जा रहा है चिंता का कारण

Deepfake तकनीक यह क्षमता है कि वो AI की मदद से ऐसे वीडियो बना सकती है जिसे संबंधित व्यक्ति ने कभी कहा हीं नहीं हो। यह देखने में बिल्कुल वास्तविक लगता है। जिसका अधिकतर उपयोग गलत जानकारी प्रचार- प्रसार करने के लिए किया जाता है। कई बार इससे लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। लोग डिफेमिनेशन के कारण अपनी जान तक देने को उतारू हो जाते हैं।

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प्रसिद्ध हस्तियां, राजनेताओं और पत्रकारों को लाभ

YouTube का कहना है कि इससे चर्चित हस्तियां ज्यादा शिकार होते हैं। इसमें राजनेता और पत्रकार भी शामिल हैं। इसलिए उन्हें यह टूल दिया जा रहा है ताकि वे अपनी पहचान का दुरुपयोग रोक सकें। यह टूल खास तौर पर राजनेताओं, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों के लिए तैयार किया गया है। अगर किसी वीडियो में उनकी नकली छवि बनाई गई है, तो वे उसे पहचान सकेंगे। जरूरत पड़ने पर उसे हटाने का अनुरोध भी कर सकेंगे।

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टूल इस्तेमाल करने के लिए पहचान जरूरी

इस सेवा का उपयोग करने के लिए पहले पहचान सत्यापित करनी होगी। उपयोगकर्ता को एक छोटा वीडियो सैंपल देना होगा। साथ ही सरकार द्वारा जारी आईडी भी जमा करनी होगी। इसके बाद सिस्टम उनके चेहरे को पहचानना सीख जाएगा। और फिर डिटेक्शन पर काम करना शुरू कर देगा। संदिग्ध वीडियो मिलने पर उपयोगकर्ता उसे देख सकते हैं। उसे हटवा सकते हैं।

कंपनी की ओर से डीपफेक पर लगाम लगाने के लिए बेहतर प्रयास माना जा सकता है।

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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