कौन है Akash Bobba? बना एलन मस्क के DODGE का हिस्सा

7 mins read
1.1K views
Akash Bobba
February 4, 2025

भारतीय मूल के इंजीनियर आकाश बोब्बा इन दिनों चर्चा में हैं। वे एलन मस्क द्वारा स्थापित ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ से जुड़े हैं।

Who Is Akash Bobba: भारतीय मूल के इंजीनियर आकाश बोब्बा इन दिनों विवादों में घिरे हुए नजर आ रहे हैं। यह विवाद एलन मस्क द्वारा स्थापित DOGE से जुड़ा हुआ है। इस सरकारी एजेंसी ने हाल ही में 19 से 24 साल की आयु के 6 युवा इंजीनियरों की नियुक्ति की है। इन्हीं में से एक हैं आकाश बोब्बा जो 22 साल के हैं। ये नियुक्तियां इसलिए चर्चा में आई है क्योंकि इन युवा इंजीनियरों को सरकारी सिस्टम तक पहुंच दी गई है। कुछ एक्सपर्ट की मानें तो इतने कम एक्सपीरियंस वाले युवाओं को सरकार में इम्पोर्टेंट पदों पर रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। हालांकि, आलोचनाओं के बावजूद एक शानदार कोडर से सरकारी एजेंसी के इनसाइडर तक का बोब्बा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।

DOGE में शामिल होने से पहले आकाश बोब्बा ने टेक्नोलॉजी और AI के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने UC Berkeley के प्रबंधन, एंटरप्रेन्योरशिप और टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में पढ़ाई किया, जिसे फ्यूचर के टेक्नोलॉजी लीडर्स को तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इन कंपनियों में किया इंटर्नशिप

अपने करियर की शुरुआत में आकाश बोब्बा ने Meta, Palantir और Bridgewater Associates जैसी कंपनियों में इंटर्नशिप भी की है। इन कंपनियों में उन्होंने AI, data analytics और financial modeling में विशेषज्ञता हासिल की है। आकाश बोब्बा को जो खास बनाती है वह है उनकी अद्भुत समस्या-समाधान क्षमता और कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहने की उनकी क्षमता।

दोस्त ने शेयर की घटना

बोब्बा की प्रतिभा का एक बेहतरीन उदाहरण उनके Berkeley के दिनों की है। उनके एक सहपाठी चारिस झांग ने एक घटना साझा की है, जो उनकी गहरी समझ और तेज कोडिंग स्किल्स को दर्शाती है। चारिस झांग ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि, हम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, और मैंने गलती से पूरी कोड फाइल डिलीट कर दी। मैं घबरा गया, लेकिन आकाश ने बस स्क्रीन की तरफ देखा, कंधे उचकाए और एक रात में पूरी कोडिंग फिर से लिख दी। पहले से भी बेहतर। हमने समय से पहले प्रोजेक्ट सबमिट किया और क्लास में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

DODGE  में युवा नयुक्ति पर विवाद

आकाश बोब्बा अकेले युवा इंजीनियर नहीं हैं, जिन्हें एलन मस्क की सरकारी एजेंसी में शामिल किया गया है। DOGE टीम में कुल 6 नए इंजीनियर शामिल हुए हैं, जिनमें से कई हाल ही में ग्रेजुएट हुए हैं या फिर कॉलेज के छात्र हैं। इन सभी को सरकारी ईमेल और हाई लेवल सिक्योरिटी दी गई है।

क्या कहते हैं आलोचक

लोगों का कहना है कि भले ही ये युवा बेहद टैलेंटेड हैं, लेकिन इनमें से किसी के पास सरकारी या पब्लिक सर्विस का अनुभव नहीं है। कुछ सिक्योरिटी एक्सपर्ट को चिंता है कि इन युवा इंजीनियरों को GSA और OPM जैसी एजेंसियों तक पहुंच देना नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा हो सकता है।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Apple
Previous Story

Valentine’s Day पर अपने ‘प्यार’ को दें ये Apple प्रोडक्ट्स

AI
Next Story

AI से बनाई बच्चों की ‘गंदी तस्वीर’ तो खैर नहीं!

Latest from Latest news

technology

भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 

Don't Miss