TikTok age verification: TikTok पर उम्र छुपाकर अकाउंट चलाने वालों के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। यूरोप में नियामकों के बढ़ते दबाव के बीच TikTok ने एक ऐसा AI सिस्टम उतार दिया है। जो प्रोफाइल नहीं बल्कि यूज़र के वीडियो, व्यवहार और एक्टिविटी देखकर तय करेगा कि अकाउंट नाबालिग का है या नहीं। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर यह कदम Social Media की दुनिया में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। जिससे फर्जी उम्र दर्ज करने वाले खातों को चिन्हित किया जा सकेगा। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
यूरोप में TikTok ने शुरू की नई उम्र पहचान तकनीक। AI से होगा नाबालिग अकाउंट्स का पता, जानिए कैसे बदलेगा सोशल मीडिया का नियम।
सीधे बैन नहीं, मॉडरेटर करेंगे अंतिम फैसला
नई प्रणाली के तहत संदिग्ध खातों को स्वतः हटाया नहीं जाएगा। TikTok ने साफ किया है कि ऐसे अकाउंट्स की जांच विशेष रूप से प्रशिक्षित मॉडरेटर करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी वैध यूज़र का अकाउंट गलती से बंद न हो।
यूरोप में बढ़ती नियामकीय सख्ती से बढ़ा दबाव
यह कदम ऐसे समय आया है जब यूरोपीय नियामक Social Media पर Age Verifications को लेकर सख्ती दिखा रहे हैं। अधिकारियों को चिंता है कि मौजूदा सिस्टम या तो बच्चों की सही पहचान नहीं कर पाते या फिर यूज़र्स की निजता पर जरूरत से ज्यादा दखल देते हैं।
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दुनिया भर में सख्त नियमों की तैयारी
विश्वस्तर पर भी Social Media पर बच्चों की मौजूदगी को लेकर कड़े फैसले सामने आ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन चुका है। वहीं, यूरोपीय संसद और डेनमार्क जैसे देश भी आयु सीमा तय करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
अभी भी कोई वैश्विक समाधान नहीं
TikTok के अनुसार, ब्रिटेन में किए गए परीक्षण के दौरान हजारों ऐसे अकाउंट्स की पहचान हुई, जो 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के थे। कंपनी का कहना है कि आज भी ऐसा कोई सार्वभौमिक तरीका मौजूद नहीं है। जिससे किसी व्यक्ति की उम्र की पुष्टि पूरी निजता के साथ की जा सके। यही कारण है कि उम्र जांच सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सबसे जटिल मुद्दों में से एक बनी हुई है।
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गलत बैन पर अपील की सुविधा
यदि किसी यूज़र का अकाउंट गलती से प्रतिबंधित होता है, तो अपील प्रक्रिया के दौरान चेहरे से उम्र अनुमान लगाने वाली तकनीक, क्रेडिट कार्ड जांच और सरकारी पहचान पत्रों का उपयोग किया जाएगा। यह प्रक्रिया सत्यापन कंपनी Yoti के सहयोग से की जाएगी।
डेटा प्रोटेक्शन आयोग से समन्वय
TikTok ने बताया कि यह तकनीक विशेष रूप से यूरोप के कड़े डेटा सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसे विकसित करते समय आयरलैंड की Data Protection Commission के साथ लगातार समन्वय किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि TikTok का यह कदम आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की सुरक्षा, यूज़र की निजता और कानून तीनों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
