बिकने जा रही है यह बड़ी कंपनी, फैंस हुए नाराज

4 mins read
706 views
बिकने जा रही है यह बड़ी कंपनी, फैंस हुए नाराज
March 13, 2025

Niantic के सीईओ जॉन हैंके ने कहा कि यह कदम कंपनी के “शाश्वत खेल” बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। Scopely का ध्यान बेहतरीन लाइव सर्विस गेम बनाने और चलाने पर है।

Niantic : Pokémon Go बनाने वाली कंपनी Niantic ने ऐलान किया है कि वह अपना गेमिंग डिवीजन मोबाइल गेमिंग कंपनी Scopely को 3.5 बिलियन डॉलर या करीब 30,481,06,08,200 रुपये में बेच रही है। इस सौदे में Pokémon Go, Pikmin Bloom और Monster Hunter Now जैसे फेमस गेम मौजूद हैं। यह बिक्री Niantic की भू-स्थानिक AI पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।

Niantic क्यों बेच रहा है अपना गेमिंग बिजनेस?

Niantic के CEO जॉन हैंके ने इस मामले को लेकर कहा है कि यह कदम कंपनी के forever games बनाने के दृष्टिकोण के मेल खाता है। Scopely अब शानदार लाइव सर्विस गेम बनाने और चलाने पर फोकस कर रही है और बड़े ब्रांडों के साथ काम करने और उनके खिलाड़ियों के कम्युनिटी की देखभाल करने में माहिर है। इसलिए, यह हमारे गेम के लिए एकदम सही प्लेटफॉर्म है। इस सौदे में Niantic की ओर से अतिरिक्त 350 मिलियन डॉलर का नकद वितरण भी शामिल है, जिससे कुल सौदे का मूल्य 3.85 बिलियन डॉलर हो जाता है।

Scopely में क्या मिलेगा

सऊदी अरब के PIF गेमिंग ग्रुप Savvy Games Group की सहायक कंपनी Scopely अब Pokémon Go जैसे AR गेम के साथ अपने पोर्टफोलियो का डेवलप करेगी। कंपनी पहले ही Marvel Strike Force और Star Trek Fleet Command जैसे सफल मोबाइल गेम विकसित कर चुकी है।

Pokémon Go को क्या मिलेगा अपडेट?

Niantic ने कहा हमारी गेम टीमों के पास लॉन्ग टर्म योजनाएं हैं और वह उन्हें आगे बढ़ाने के लिए Scopely के साथ मिलकर काम करेंगे। खिलाड़ी उन्हीं खेलों, ऐप्स, सेवाओं और कार्यक्रमों का आनंद लेना जारी रखेंगे जिन्हें वे जानते और पसंद करते हैं।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Nikola Tesla
Previous Story

Tesla से पहले भारत में इस Tesla ने मारी थी बाजी

SpaceX
Next Story

अश्विनी वैष्णव ने भारत में Starlink की एंट्री का किया स्वागत

Latest from Latest news

technology

भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 

Don't Miss