क्या ईरान अपनी मिसाइल में चीन के GPS का इस्तेमाल कर रहा है?

क्या ईरान अपनी मिसाइल में चीन के GPS का इस्तेमाल कर रहा है?

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March 13, 2026

Iran China Military: ईरान के हालिया मिसाइल हमलों के बाद दुनियाभर के इंटेलिजेंस एक्सपर्ट में एक बड़ा सवाल उठ रहा है। क्या ईरान अब अपनी मिसाइल और ड्रोन को गाइड करने के लिए चीन का BeiDou सैटेलाइट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है? Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, कई विश्लेषक यही मान रहे हैं।

क्यों उठ रहा है ये सवाल?

विश्लेषकों ने गौर किया है कि ईरान के हालिया हमले पहले से कहीं ज्यादा सटीक रहे हैं। फ्रांस के पूर्व इंटेलिजेंस अधिकारी अलेन जुइलेट का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह BeiDou सिस्टम तक ईरान की पहुंच हो सकती है। हालांकि, ईरान ने खुद इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन एक्सपर्ट  का मानना है कि इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ईरान के हालिया मिसाइल हमले पहले से ज्यादा सटीक क्यों हैं? एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान चीन का मिसाइल यूज कर रहा है।

BeiDou system क्या है?

BeiDou चीन का अपना सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है, जो अमेरिका के GPS का सीधा प्रतिद्वंद्वी है। इसे 2020 में पूरी तरह लॉन्च किया गया था, जिसका  उद्घाटन खुद चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने किया था। ये सिस्टम बिल्कुल GPS की तरह काम करता है।

सैटेलाइट जमीन पर मौजूद रिसीवर को सिगनल भेजते हैं और रिसीवर ये हिसाब लगाता है कि सिगनल आने में कितना वक्त लगा, जिससे उसकी सटीक लोकेशन पता चलती है। BeiDou में करीब 45 सैटेलाइट हैं, जबकि GPS में सिर्फ 24। रसिया के GLONASS और यूरोप के Galileo system में भी GPS जितनी ही सैटेलाइट हैं, लेकिन BeiDou इन सबसे आगे है।

ईरान और BeiDou का कनेक्शन

2015 में ईरान ने BeiDou के पुराने वर्जन  को अपने कुछ इन्फ्रास्ट्रक्चर में शामिल करने का समझौता किया था फिर 2021 में चीन और ईरान के बीच एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी हुई, जिसके बाद विश्लेषक मानते हैं कि ईरान ने धीरे-धीरे BeiDou को अपने मिसाइल गाइडेंस और कम्युनिकेशन सिस्टम में घुसाना शुरू किया। एक और बड़ी वजह ये है कि पिछले कुछ संघर्ष में ईरान के ड्रोन्स और मिसाइल्स के GPS सिगनल को जाम कर दिया गया था। इसके बाद ईरान को एहसास हुआ कि अमेरिका के सिस्टम पर निर्भर रहना खतरनाक है।

सैटेलाइट नेविगेशन से मिसाइल कितनी सटीक होती है?

मॉडर्न मिसाइल में आमतौर पर इंटरनेट नेविगेशन सिस्टम होता है जो जाइरोस्कोप और एक्सेलेरोमीटर की मदद से रास्ता तय करता है, लेकिन लंबी दूरी पर छोटी-छोटी गलतियां जुड़ती जाती हैं और मिसाइल अपने निशाने से भटक सकती है। यहीं पर सैटेलाइट नेविगेशन काम आता है। ये उड़ान के दौरान एरर को सुधारता रहता है। अगर ईरान BeiDou के सटीक सिगनल इस्तेमाल कर रहा है तो उसकी मिसाइल बहुत कम भटकेंगी। इसके अलावा एक साथ कई नेविगेशन सिस्टम  यूज करने से जाम का खतरा भी कम हो जाता है।

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दुनिया के लिए क्या मायने रखता है ये?

अगर ईरान सच में BeiDou यूज कर रहा है तो ये मिलिट्री टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव है। अब तक पश्चिमी देशों का GPS ही सबकी पहली पसंद रहा है, लेकिन वैकल्पिक सिस्टम की मौजूदगी से देश ऐसे हथियार बना सकते हैं, जो अमेरिका के बुनियादी ढांचे पर निर्भर न हों। कुछ एक्सपर्ट ये भी कह रहे हैं कि मध्य पूर्व की ये जंग चीन के लिए एक बड़ी लाइव टेस्टिंग लैब है। BeiDou-guided systems का एडवांस एयर डिफेंस के खिलाफ परफॉर्मेंस देखकर चीन अपनी मिलिट्री टेक्नोलॉजी को और बेहतर बना सकता है।

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ईरान का मिसाइल भंडार

ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा ब्लास्टिक मिसाइल भंडार माना जाता है। इनमें छोटी दूरी से लेकर हजारों किलोमीटर तक मार करने वाली मसाइल शामिल हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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