क्ह्यूमन ब्रेन कंप्यूटिंग का दौर शुरू, जानें क्यों कहा जा रहा ऐसा?

क्ह्यूमन ब्रेन कंप्यूटिंग का दौर शुरू, जानें क्यों कहा जा रहा ऐसा?

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March 10, 2026

Biological data centre: AI के दौर में बिजली खपत सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। लोगों ने डर हैं इसमें अधिक बिजली खपत का असर आमलोगों पर अधिक पड़नेवाली है। पर्यावरण भी इस प्रकोप से वंचित नहीं रहनेवाले हैं। हालांकि, कई टेक कंपनियां इसको लेकर साकारात्मक कदम भी उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों को भरोसा भी दे रहे हैं कि इसका प्रभाव आमजनों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। फिर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच, राहत भरी खबर निकलकर सामने आई है कि ऑस्ट्रेलिया की कंपनी Cortical Labs जैविक डेटा सेंटर बनाने जा रही है। जो मनुष्य के मस्तिष्क की कोशिकाओं से संचालित होगी। होंगे। बताया जा रहा है कि इस तकनीक का उद्देश्य कम बिजली में ज्यादा कुशल कंप्यूटिंग करना है।

आ रहा है अब मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं से चलनेवाला डेटा सेंटर का दौर, Cortical Labs की नई तकनीक कंप्यूटिंग की दुनियां में लाने जा रहा है बड़ा बदलाव। जानें यहां।

जैविक कंप्यूटर यूनिट लगाने की तैयारी

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक Cortical Labs मेलबर्न और सिंगापुर में ऐसे डेटा सेंटर बनाने जा रही हैं। मेलबर्न में 120 CL1 यूनिट लगाने जा रही है। इस प्रॉजेक्ट में DayOne डेटा सेंटर कंपनी साझेदार के तौर पर शामिल है। इन डेटा सेंटरों में वर्तमान समय के प्रचलित सर्वर या प्रोसेसर नहीं होंगे। इसके बदले CL1 नाम के जैविक कंप्यूटर यूनिट लगाए जाएंगे। जो मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स से संचालित होंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह कंप्यूटिंग की दुनिया में बिल्कुल नया प्रयोग के तौर पर जाना जाएगा।

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कैसे करता है काम?

न्यूरॉन्स को स्टेम सेल के माध्यम से विकसित किए जाते हैं। इस एक खास चिप पर रख दी जाती है।  वहां से कोशिकाओं को इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने की प्रक्रिया शुरू होती है। फिर दूसरी तरफ से प्रतिक्रियाएं भी आने लगती है। और फिर कोशिकाओं और Software के बीच बातचीत शुरू होती है। इनके हो रहे वार्तालाप को कंप्यूटिंग आउटपुट के रूप में पढ़ता है। बिल्कुल इसी तरह मनुष्य के मस्तिष्क की क्षमता को भी डेटा प्रोसेसिंग में उपयोग करने की तैयारी चल रही है।

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AI प्रोसेसर की तुलना में बेहद कम बिजली का यूज

कंपनी का कहना है कि डेटा सेंटर के लिए पानी और बिजली की समस्याएं चिंता का विषय बनकर उभरी है। टेक कंपनियां इन समस्याओं के सामाधान के लिए विकल्प तालाश रही हैं। वे एक ऐसी कंप्यूटिंग सिस्टम की खोज में हैं जो इन समस्याओं से काफी हद तक निजात दिला सके। ऐसी परिस्थिति में जैविक कंप्यूटर पारंपरिक AI प्रोसेसर की तुलना में काफी कम बिजली का उपयोग करते हैं। यह दावा मैं नहीं Cortical Labs खुद कर रही है। कंपनी के CEO Hon Weng Chong  का कहना है कि CL1 यूनिट में बिजली की खपत एक यूनिट की बिजली खपत एक साधारण हस्तगणना से भी कम हो सकती है।.

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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