दुनिया भर में बढ़ा स्पाइवेयर खतरा, ऐपल- गूगल ने दी चेतावनी! जानें बचने के टिप्स

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December 8, 2025

Apple Google Warning: दुनिया भर में साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच टेक दिग्गज Apple और Google ने दुनियां के करीब 76 से ज्यादा देशों के यूजर्स को गंभीर चेतावनी भेजी है। खासकर वैसे देश जहां के लोग Smartphone अधिक इस्तेमाल करते हैं। कंपनियों का कहना है कि कुछ एडवांस जासूसी सॉफ्टवेयर लोगों के स्मार्टफोन में घुसकर उनकी निजी जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे हैं। यह खतरा आम Cybercrime जैसा नहीं है। यह तो ऐसे टूल से जुड़ा है जिनका इस्तेमाल हाई लेवल स्पाइंग और सरकारी एजेंसियों द्वारा किया जाता है।

दुनियां के 76 प्रतिशत देशों में साइबर खतरा बढ़ा, ऐपल और गूगल ने यूजर्स को चेताया। जानें कैसे जासूसी सॉफ्टवेयर फोन में घुसकर आपकी प्राइवेसी खतरे में डाल सकता है और इससे बचने के उपाय।

कैसी है ये चेतावनी, जान लिजिए

The 420 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2 दिसंबर को ऐपल ने कई उपयोगकर्ताओं को मैसेज भेजकर बताया कि उनका डिवाइस संभावित हमले के निशाने पर है। कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने लोगों को नोटिस मिला, लेकिन कहा कि खतरा बेहद गंभीर है। ऐपल ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे अलर्ट काफी बढ़ाए हैं। ताकि जब भी किसी यूजर पर स्पाइवेयर हमले की कोशिश का पता चले उसे तुरंत सूचना दी जा सके। इसके अगले ही दिन, 3 दिसंबर को गूगल ने भी चेतावनी जारी की। कंपनी ने बताया कि Intellexa नाम का जासूसी सॉफ्टवेयर दुनिया के कई देशों में सक्रिय है और सैकड़ों अकाउंट पर हमला करने की कोशिश कर रहा है। यह सॉफ्टवेयर पाकिस्तान, कजाकिस्तान, अंगोला, मिस्र, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब और ताजिकिस्तान जैसे देशों में ज्यादा सक्रिय पाया गया है। अमेरिका ने इंटेलेक्सा पर पहले ही प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद यह गुपचुप तरीके से ऑपरेशन चला रहा है।

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बिना चेतावनी के घुस सकता है फोन में

विशेषज्ञों की माने तो यह स्पाइवेयर बहुत खतरनाक है। यह बिना किसी चेतावनी के फोन में घुस सकता है। एक बार सक्रिय होने के बाद यह मैसेज, फोटो,लोकेशन,कॉल रिकॉर्ड,पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच सकता है। हैरान की बात यह है कि कई बार कैमरा और माइक्रोफोन भी चालू कर देता है और यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती। इसी वजह से ऐपल और गूगल द्वारा भेजी गई चेतावनियां बेहद अहम मानी जाती हैं। कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां इन अलर्ट के आधार पर जांच शुरू करती हैं और समझने का प्रयास करने लगती है कि आखिर कौन लोग और किस मकसद से ऐसे हमले करा रहे हैं।

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गोपनीयता और सुरक्षा पर नई बहस

इस घटना के बाद फिर से यह विवाद गहरा गया है कि सुरक्षा और निजता में संतुलन कैसे बनाया जाए। एक तरफ सरकारें कहती हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसे टूल जरूरी हैं। दूसरी कई मानव हितैषी संगठनों द्वारा कहा जाता है कि यह निजता के लिए खतरनाक है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि जासूसी सॉफ्टवेयर बनाने और बेचने वाली कंपनियों पर सख्त नियम लागू हों।

खुद को बचाने के लिए इस टिप्स को अपनाएं

ऐपल और गूगल ने सलाह दी है कि ऐसा अलर्ट मिलने पर यूजर्स तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं। सबसे पहले फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट करें। सभी पासवर्ड बदलें टू स्टेप वेरिफिकेशन या दो स्तर वाली सुरक्षा सक्रिय करें। अनजान या संदिग्ध लिंक पर बिल्कुल भी क्लिक न करें। इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों से किसी भी बड़े खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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