Supreme Court AI: SC जल्द ही एक बड़ा बदलाव करने वाला है। देश की सबसे बड़ी अदालत अब AI की मदद से केस लिस्टिंग और बेंच अलॉटमेंट का काम करवाने की तैयारी में है। यानी की AI अब कौन सा केस किस जज के सामने जाएगा, यह फैसला अब इंसान नहीं, बल्कि एक सॉफ्टवेयर करेगा।
SC के केस अब AI सॉफ्टवेयर मैनेज करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने केस लिस्टिंग और जजों की बेंच तय करने में पारदर्शिता लाने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है।
ये बदलाव क्यों हो रहा है?
यह कदम चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने उठाया है। दरअसल, कोर्ट के अंदर एक आंतरिक जांच हुई जिसमें कुछ रजिस्ट्री अधिकारी सालों से एक ही पोस्ट पर बैठे थे, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश बन रही थी और कोर्ट का पूरा एडमिनिस्ट्रेशन पुराने तरीकों पर चल रहा था जैसी दो बड़ी खामियां सामने आईं।इन्हीं कमजोरियों की वजह से केस अलॉटमेंट में गड़बड़ियां होने की संभावना बन रही थी।
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मामला कैसे सामने आया?
यह पूरा मसला तब उजागर हुआ जब इरफान सोलंकी की एक याचिका सुनवाई के लिए आई थी। यह याचिका यूपी के गैंगस्टर एक्ट के कुछ प्रावधानों को चुनौती दे रही थी। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने बताया कि इसी तरह की एक याचिका पहले ही पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की तीन जजों की बेंच खारिज कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लगभग एक जैसा केस एक नई बेंच के सामने आ गया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस चूक को बेहद गंभीरता से लिया। वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि यह केस अब पेंडिंग रहेगा और इसका पूरा निपटारा किया जाएगा।
अभी तक क्या होता था?
फिलहाल, CJI को ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ कहा जाता है। यह अधिकार हमेशा से चर्चा और सवालों के घेरे में रहा है क्योंकि इसमें इंसानी दखल रहता है।
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AI से क्या-क्या होगा?
- केस की लिस्टिंग
- बेंच का अलॉटमेंट
- एडमिनिस्ट्रेटिव शेड्यूलिंग
इसका मकसद साफ है कि जहां भी इंसानी दखल हटाया जा सके, वहां टेक्नोलॉजी को लाओ ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बने। यह बदलाव छोटा दिखता है, लेकिन असर बहुत बड़ा हो सकता है।
