Super Cold Air Battery: Renewable Energy के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे चीन ने Energy Storage की समस्या का बड़ा समाधान पेश किया है। चीन दुनिया की सबसे बड़ी Super Cold Air Battery बना रहा है। जिसे लिक्विड एयर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम कहा जा रहा है। यह परियोजना गोबी रेगिस्तान में किंगहाई प्रांत के गोलमुड शहर के पास स्थापित की जा रही है। इसे भविष्य के पावर ग्रिड के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तो आइए जानते हैं आखिर कैसे तैयार करता है लिक्विड एयर एनर्जी।
अब सोलर और विंड एनर्जी नहीं होगी बेकार! चीन की लिक्विड एयर बैटरी कैसे करेगी लाखों यूनिट बिजली स्टोर…जानिए पूरी डिटेल।
सोलर और विंड एनर्जी की सीमा
दरअसल, Solar और Wind Energy पर्यावरण के अनुकूल तो हैं। लेकिन इनकी सबसे बड़ी चुनौती अस्थिरता है। कभी सूरज तेज चमकता है तो कभी हवा की गति कम हो जाती है। इससे बिजली उत्पादन और मांग में संतुलन बिगड़ जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए चीन ने Super Cold Air Battery जैसी तकनीक को अपनाया है। जो अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय ग्रिड में भेजने में सक्षम होगी। इसे बनाने में China Green Development Investment Group और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के Technical Institute of Physics and Chemistry of the Chinese की मदद ली गई है।
हवा से बिजली स्टोर करने की तकनीक
इस प्रणाली में पहले अतिरिक्त बिजली की मदद से हवा को साफ किया जाता है। इसके बाद उसे अत्यधिक दबाव में माइनस 194 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है, जिससे हवा तरल रूप में बदल जाती है। इस लिक्विड हवा को बड़े और सुरक्षित टैंकों में संग्रहित किया जाता है, ताकि लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षित रह सके।
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जरूरत पड़ने पर बिजली का उत्पादन
जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो संग्रहित लिक्विड हवा को गर्म किया जाता है। तापमान बढ़ते ही हवा तेजी से फैलती है। इसी फैलाव की शक्ति से टरबाइन घूमते हैं और बिजली का उत्पादन शुरू हो जाता है। यह पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के लिए सुरक्षित मानी जाती है और इसमें प्रदूषण भी नहीं होता।
उत्पादन क्षमता और सोलर से जुड़ाव
रिपोर्ट्स के अनुसार यह सुपर एयर पावर बैंक एक बार में करीब 6 लाख किलोवाट-घंटे बिजली देने में सक्षम होगा और लगातार 10 घंटे तक संचालित हो सकेगा। सालभर में इससे लगभग 18 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन की संभावना है, जो करीब 30 हजार घरों की जरूरत पूरी कर सकती है। इस प्लांट को 2.5 लाख किलोवाट क्षमता के सोलर फार्म से जोड़ा गया है।
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भविष्य की ऊर्जा नीति की झलक
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिजली ग्रिड को ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद बनाएगी। अतिरिक्त बिजली को स्टोर करने की यह क्षमता फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाएगी। चीन की यह पहल संकेत देती है कि आने वाले समय में ऊर्जा की दुनिया में असली बदलाव उत्पादन से ज्यादा स्टोरेज तकनीक के जरिए देखने को मिलेगा।
