Kashmir Pahalgam Attack: क्या है Digital Footprint ? पाकिस्तान से जुड़ा कनेक्शन बेनकाब

8 mins read
1K views
Digital Footprint
April 24, 2025

पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद, डिजिटल फुटप्रिंट्स ने पाकिस्तान से जुड़े एक आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

Digital Footprint : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को दुख और गुस्से से भर दिया है। इस हमले में अबतक 26 मासूम लोगों की जान चली गई है, जिसके बाद पूरे भारत में आक्रोश है और लोग सरकार से सख्त एक्शन की मांग कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब सिर्फ बंदूक और बम नहीं, बल्कि डिजिटल सबूतों पर भी फोकस कर रही हैं और इन्हें ही कहा जाता है Digital Footprint

क्या होता है Digital Footprint?

जैसे हम कहीं जाते हैं और हमारे पैर पीछे निशान छोड़ जाते हैं, वैसे ही इंटरनेट पर हमारी हर एक्टिविटी का एक निशान बनता है। जब हम Google पर कुछ सर्च करते हैं, कोई वीडियो देखते हैं, वेबसाइट खोलते हैं या किसी से चैट करते हैं, तो इन सभी कामों का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनता है। यही Digital Footprint कहलाता है। सुरक्षा एजेंसियां इसी Digital Footprint की मदद से ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हमले में शामिल आतंकियों का किससे संपर्क था, उन्होंने कहां से जानकारी हासिल की, किस ऐप का इस्तेमाल किया और क्या वे पाकिस्तान के किसी ठिकाने से जुड़े हुए थे।

Digital Footprint के दो रूप

Digital Footprint दो तरह के होते हैं। इनमें एक्टिव Digital Footprint और पैसिव Digital Footprint शामिल है।

  • एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट: यह वह जानकारी होती है, जो हम खुद अपनी मर्जी से इंटरनेट पर डालते हैं। जैसे कि सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट या फोटो शेयर करना, किसी वेबसाइट पर कमेंट करना, फॉर्म भरना या किसी न्यूजलेटर के लिए साइन अप करना शामिल है।
  • पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट: यह वो डेटा होता है, जो हमारे बिना जाने रिकॉर्ड हो जाता है। जैसे कि आप किस वेबसाइट पर गए, आपने वहां कितनी देर बिताई, आपने किस लिंक पर क्लिक किया या माउस रखा, यह जानकारी बैकग्राउंड में इकट्ठी होती रहती है, और हमें इसका एहसास तक नहीं होता।

कैसे खुला आतंकियों का पाकिस्तान कनेक्शन?

पहलगाम हमले के बाद जब सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल से बरामद मोबाइल, लैपटॉप और रेडियो जैसे डिवाइस की जांच की, तो चौंकाने वाले डिजिटल सुराग सामने आए। आतंकियों ने एन्क्रिप्टेड चैटिंग ऐप्स का यूज किया था, जिन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों ने डिजिटल फुटप्रिंट की मदद से पता लगा लिया कि इन ऐप्स से की गई बातचीत सीधे पाकिस्तान के कुछ लोकेशनों से हो रही थी। जांच में साफ हुआ कि बातचीत मुजफ्फराबाद और कराची जैसे पाकिस्तानी शहरों में मौजूद कुछ खास ठिकानों से की जा रही थी।

क्यों जरूरी है डिजिटल फुटप्रिंट की जानकारी?

आजकल की लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि जानकारी और टेक्नोलॉजी से भी लड़ी जाती है। ऐसे में डिजिटल फुटप्रिंट यानी इंटरनेट पर हमारे द्वारा छोड़े गए निशान बहुत अहम हो जाते हैं। ये फुटप्रिंट ऐसे सुराग होते हैं जो किसी भी बड़ी साजिश की परतें खोल सकते हैं।

आम लोग भी छोड़ते हैं डिजिटल निशान

आप जब कोई वेबसाइट खोलते हैं, Google पर कुछ सर्च करते हैं या सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट लाइक करते हैं, तो ये सब आपकी ऑनलाइन पहचान का हिस्सा बन जाता है। यही वजह है कि आपने अगर कभी मोबाइल या शूज सर्च किया हो, तो कुछ देर बाद हर जगह उसी से जुड़े विज्ञापन दिखने लगते हैं।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

social media
Previous Story

Kashmir Pahalgam Attack: पाकिस्तान में मचा डिजिटल तूफान

Pakistani website and X blocked
Next Story

Kashmir Pahalgam Attack: भारत में पाकिस्तान की वेबसाइट और X ब्लॉक

Latest from Latest news

Snapdragon को सीधी चुनौती

Snapdragon को सीधी चुनौती! MediaTek Dimensity 9500s ने मचाया तहलका!

MediaTek Dimensity 9500s: MediaTek ने अपने टॉप सेगमेंट को और मजबूती प्रदान करने की दिशा में कदम बढा दिया है। कंपनी ने Dimensity 9500s पेश किया है। यह चिप कंपनी के पहले से मौजूद Dimensity 9500 का अपग्रेड है। यह उन स्मार्टफोन्स ते लिए
NVIDIA-AMD पर ट्रंप का टैरिफ

NVIDIA-AMD पर ट्रंप का टैरिफ वार! AI चिप्स पर लगाया 25% टैक्स!

US chip tariff 25 percent: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उन्नत कंप्यूटिंग चिप्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने आधिकारिक आदेश
technology

भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 

Don't Miss