Gold Rate Today: क्या सोने की कीमत में आई बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए सुनहरा मौका है या फिर किसी बड़े संकट का संकेत? अभी यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। ताज़ा बाजार में सोना अपने रिकॉर्ड हाई से 30% से ज्यादा टूट चुका है और करीब 4,000 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इस गिरावट ने साल 2026 में सोने का रिटर्न भी नकारात्मक कर दिया है।
रिकॉर्ड हाई से टूटने के बाद सोने की कीमत क्यों गिरी? जानें बाजार के जानकार क्या कह रहे हैं और आगे कितना बढ़ सकता है सोना।
सोने की कीमत में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
मंगलवार को भी सोने में कमजोरी जारी रही। हाजिर सोना 0.8% गिरकर 4,129.36 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी सोना वायदा 0.6% टूटकर 4,140.90 डॉलर पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का ध्यान अब सुरक्षित निवेश से हटकर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड की ओर चला गया है। अमेरिका-ईरान तनाव के बाद ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने की आशंका ने भी बाजार की दिशा बदल दी। इसके अलावा टेक्नोलॉजी और AI शेयरों में मुनाफावसूली के दौरान कई निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए सोना बेचा।
क्या यह गिरावट लंबी चलेगी?
बाजार जानकारों के अनुसार यह कमजोरी स्थायी नहीं है। इसे एक चक्रीय गिरावट माना जा रहा है। तकनीकी चार्ट के मुताबिक 3,950 से 4,000 डॉलर का स्तर सोने के लिए मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। पहले भी इसी स्तर से कीमतों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे निवेशकों की मुनाफावसूली और बाजार की बदलती प्राथमिकताएं हैं। इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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आने वाले समय में कितनी बढ़ सकती है सोने की कीमत?
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले कुछ हफ्तों में सोना फिर से 4,400 डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं 2026 के अंत तक इसकी कीमत 4,900 से 5,000 डॉलर के बीच जा सकती है। अगर वैश्विक हालात अनुकूल रहे तो 2027 में नया रिकॉर्ड हाई भी देखने को मिल सकता है। महंगाई में कमी और भविष्य में ब्याज दरों में संभावित कटौती भी सोने के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
केंद्रीय बैंक क्यों बढ़ा रहे हैं सोने का भंडार?
भले ही इस साल ETF निवेश में कमजोरी दिखी हो, लेकिन दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं।
- 84% केंद्रीय बैंक अगले 5 साल में अपना स्वर्ण भंडार बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
- डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति भी सोने की मांग को मजबूती दे रही है।
- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वे में भी लंबे समय के लिए सोने को मजबूत निवेश माना गया है।
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फिलहाल सोने की कीमत दबाव में जरूर है, लेकिन विशेषज्ञ इसे लंबे समय की कमजोरी नहीं मान रहे। अगर वैश्विक आर्थिक हालात सामान्य रहे और केंद्रीय बैंकों की खरीद जारी रही, तो आने वाले वर्षों में सोना फिर से नई ऊंचाई छू सकता है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी साबित हो सकती है।
