China Taiwan conflict: टेक्नोलॉजी के दुनियां में एआई के आने के बाद कंपनियों की प्रतिस्पर्धा सिर्फ कंपनियों के बीच नहीं है। अब यह देशों के बीच रणनीतिक मुकाबले का रूप ले चुकी है। ताइवान सरकार की सुरक्षा एजेंसी के ताजा रिपोर्ट के मुताबकि चीन विश्वस्तरीय घेराबंदी से बचने के लिए ताइवान की चिप बनाने की ताकत को निशाना बना रही है। वे यहां हमारे तकनीक की ताकतों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच चीन की हाइब्रिड रणनीति से ताइवान सतर्क…जानिए क्यों ताइवान को सता रहा है साइबर अटैक, सैन्य दबाव और चुनावी हस्तक्षेप का खतरा।
TSMC को हथियान की कोशिश
बता दें कि चीन TSMC दुनियां की सबसे उन्नत चिप बनाने वाली कंपनी के तौर अपनी पहचान बना चुकी है। यह ऐप्पल और नविदा जैसी टेक दिग्गजों को चिप सप्लाई करती है। इसी बात से अहमियत का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितने महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट की माने तो चीन ताइवान को इसलिए निशाना बना रहा है ताकि वह उसकी उन्नत चिप निर्माण तकनीक हांसिल कर सके। उसके कुशल कर्मियों अपने साथ मिला सके।
चीन लुभाने की नीति पर कर रही है काम
इनदिनों चीन उन्नत चिप निर्माण बनाने के लिए प्रयासरत है। क्योंकि अमेरिका के साथ बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच बीजिंग उन्नत Semiconductor के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर ज़ोर दे रहा है। इसे ताइवान के तकनीक को हड़पकर आगे बढने की नीति पर काम रही है। ऐसा रिपोर्ट से लग रहा है। ताइवान ने उन्नत तकनीकों को चीन तक पहुँचने से रोकने के लिए कड़े कानून भी बनाए हैं। इनके ऐजेंसियों का कहना है कि चीन सीधे-सीधे कंपनियों पर दबाव डालने के बजाए लुभाने की नीति पर कार्य कर रही है। यहां के इंजिनियरों को बढियां वेतन और अवसर देकर चीन में काम करने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से जानकारी भी हांसिल करने की कोशिश की जा रही है।
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आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश
इसके अलावे चीन पर यह भी आरोप है कि चीन ताइवान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशें कर रही है। इसी साल के अंत में ताइवान में स्थानीय चुनाव होने हैं। जिसमें चीन की दखलअंदाजी की आशंकाएं जताई जा रही है। इनमें deepfakes और फर्जी जनमत सर्वेक्षण शामिल हो सकते हैं। हलांकि इस मामले में को अधिकारिक प्रतिक्रिया ताइवान की तरफ से नहीं आई है। चीन का यह कहना कि ताइवान उसके ही प्रांत में से एक है।
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17 करोड़ से भी ज़्यादा बार घुसपैठ की कोशिश
रिपोर्ट की माने तो इस साल के पहली तिमाही में ताइवान के सरकारी नेटवर्क पर 17 करोड़ से ज्यादा सरकारी हमले हुए हैं। यह रिपोर्ट ब्यूरो के महानिदेशक त्साई मिंग-येन द्वारा दी गई है। इतना ही नहीं सैन्य मोर्चे पर भी साल की शुरूआत में 420 से अधिक चीनी विमान सीमा के आसपास देखे गए हैं। इसके अलाने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान में साल के अंत में होने वाले चुनावों में दखल देने की ज़मीन तैयार करने में जुटी हुई है। जिसका मकसद खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और डेटा चोरी करने के अपने प्रयासों का विस्तार करना है।
ताइवान की सरकार बीजिंग के संप्रभुता के दावों को दरकिनार कर दिया है। उनका कहना है कि द्वीप के लोग ही अपने भविष्य का निर्णय लेने में खुद सक्षम हैं।
